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6 साल की बच्ची अपनी मां के लिए बनी मां | UPUKLive
6 साल की बच्ची अपनी मां के लिए बनी मां
जो प्यार, करुणा और देखभाल का स्वभाव ईश्वर ने बेटियों को दिया है, वह बेटों को हासिल नहीं है। मां को ब्रेन हैमरेज हो जाने के बाद छह साल की मासूम ने जिस तरह से मां की देखभाल की, उसे देखकर लगता है कि मां असल में बेटी है और बेटी मां है। काई चेंगचेंग जब महज छह साल की थी, तो उसकी मां चेन ली को ब्रेन हैमरेज हो गया था। इसकी वजह से उनकी याददाश्त खराब हो गई।
बीते चार साल से अपनी मां को पढ़ना, लिखना और बोलना सिखाना ही काई की दिनचर्या का हिस्सा हो गया है। वह कहती है कि कभी मां ने मुझे पढ़ना, लिखना सिखाया था, अब मेरी बारी है कि मैं अपनी मां को पढ़ना लिखना सिखाऊं। मैं मां के लिए पढ़ाई किसी खेल की तरह सिखाती हूं, ताकि उनके लिए इसे समझना आसान हो जाए।
उदाहरण के लिए जब मैं उन्हें एपल के बारे में बताती हूं, तो उन्हें सेब देती हूं, ताकि वह इसे खाकर उसका स्वाद और उसके बारे में जान सकें। जब मैं रैबिट के बारे में बताती हूं, तो उन्हें खरगोश पकड़ने के लिए देती हूं।
काई के पिता एक छोटी सी दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण और पत्नी के इलाज का खर्च निकाल रहे हैं। इसलिए वह पत्नी की देखभाल के लिए ज्यादा समय नहीं निकाल पाते हैं। वहीं, बड़ा भाई काई लिंग ने हाई स्कूल में दाखिला लिया है, जिसकी वजह से वह भी मां की देखभाल नहीं कर पाता है। ऐसे में काई ही अपनी मां की देखभाल करती हैं।
वह मां को चीनी भाषा सिखाने के साथ ही उन्हें रोज समय पर दवाएं देना भी नहीं भूलती हैं। इसके साथ ही मां को जल्दी से ठीक करने के लिए वह फीजियोथैरेपी एक्सरसाइज कराती हैं। काई कहती हैं कि मां को हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी है और ठीक होने के लिए उन्हें लगातार समय पर दवाएं लेना जरूरी है। यदि कोई उन्हें याद नहीं दिलाए, तो वह दवा लेना ही भूल जाती हैं।
बीचे चार साल से काई लगातार कड़ी चुनौतियों का सामना करने के बावजूद स्कूल में न सिर्फ अच्छे ग्रेड हासिल करती हैं, बल्कि लीडरशिप रोल भी निभाती हैं। मां के प्रति काई के समर्पण को देखते हुए स्थानीय सरकार ने उन्हें पुरस्कृत किया है और स्थानीय सरकारी ब्रॉडकास्टर सीसीटीवी ने भी उन्हें पहचान दी है। चीन की मीडिया उन लोगों के बारे में अक्सर समाचार दिखाती है, जो इस तरह के काम करते हैं।
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आज भी प्रासंगिक हैं गांधी के वैश्विक विचार - Pravakta.Com | प्रवक्ता.कॉम
आज भी प्रासंगिक हैं गांधी के वैश्विक विचार
गांधी के आदर्श विचार उनके निजी जीवन तक ही सीमित नहीं रहे। उन्होंने अपने आदर्श विचारों को आजादी की लड़ाई से लेकर समाज निर्माण जैसे जीवन के विविध पक्षों में भी आजमाया। उस समय लोग कहा करते थे कि आजादी के लक्ष्य में सत्य और अहिंसा नहीं चलेगी और न ही इससे सभ्य समाज का निर्माण होगा। लेकिन गांधी ने दिखा दिया कि सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलकर भी आजादी और समाज निर्माण के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। आजादी के आंदोलन के दौरान गंाधी ने लोगों को संघर्ष के तीन मंत्र दिए-सत्याग्रह, असहयोग और बलिदान। उन्होंने खुद इसे समय की कसौटी पर कसा भी। सत्याग्रह को सत्य के प्रति आग्रह बताया। यानी आदमी को जो सत्य दिखे उस पर पूरी शक्ति और निष्ठा से डटा रहे। बुराई, अन्याय और अत्याचार का किन्हीं भी परिस्थितियों में समर्थन न करे। सत्य और न्याय के लिए प्राणोत्सर्ग करने को बलिदान कहा। अहिंसा के बारे में उनके विचार सनातन भारतीय संस्कृति की प्रतिध्वनि है। गांधी पर गीता के उपदेशों का व्यापक असर रहा। वे कहते थे कि हिंसा और कायरता पूर्ण लड़ाई में मैं कायरता की बजाए हिंसा को पसंद करुंगा। मैं किसी कायर को अहिंसा का पाठ नहीं पढ़ा सकता वैसे ही जैसे किसी अंधे को लुभावने दृश्यों की ओर प्रलोभित नहीं किया जा सकता। उन्होंने अहिंसा को शौर्य का शिखर माना। उन्होंने अहिंसा की स्पष्ट व्याख्या करते हुए कहा कि अहिंसा का अर्थ है ज्ञानपूर्वक कष्ट सहना। उसका अर्थ अन्यायी की इच्छा के आगे दबकर घुटने टेक देना नहीं। उसका अर्थ यह है कि अत्याचारी की इच्छा के विरुद्ध अपनी आत्मा की सारी शक्ति लगा देना। अहिंसा के माध्यम से गांधी ने विश्व को यह भी संदेश दिया कि जीवन के इस नियम के अनुसार चलकर एक अकेला आदमी भी अपने सम्मान, धर्म और आत्मा की रक्षा के लिए साम्राज्य के सम्पूर्ण बल को चुनौती दे सकता है। गांधी के इन विचारों से विश्व की महान विभुतियों ने स्वयं को प्रभावित बताया। आज भी उनके विचार विश्व को उत्प्रेरित कर रहे हैं। लोगों द्वारा उनके अहिंसा और सविनय अवज्ञा जैसे अहिंसात्मक हथियारों को आजमाया जा रहा है। ऐसे समय में जब पूरे विश्व में हिंसा का बोलबाला है, राष्ट्र आपस में उलझ रहे हैं, मानवता खतरे में है, गरीबी, भूखमरी और कुपोषण लोगों को लील रही है तो गांधी के विचार बरबस प्रासंगिक हो जाते हैं। अब विश्व महसूस भी करने लगा है कि गांधी के बताए रास्ते पर चलकर ही विश्व को नैराश्य, द्वेष और प्रतिहिंसा से बचाया जा सकता है। गांधी के विचार विश्व के लिए इसलिए भी प्रासंगिक हैं कि उन विचारों को उन्होंने स्वयं अपने आचरण में ढालकर सिद्ध किया। उन विचारों को सत्य और अहिंसा की कसौटी पर जांचा-परखा। 1920 का असहयोग आंदोलन जब जोरों पर था उस दौरान चैरी-चैरा में भीड़ ने आक्रोश में एक थाने को अग्नि की भेंट चढ़ा दी। इस हिंसक घटना में 22 सिपाही जीवित जल गए। गांधी जी द्रवित हो उठे। उन्होंने तत्काल आंदोलन को स्थगित कर दिया। उनकी खूब आलोचना हुई लेकिन वे अपने इरादे से टस से मस नहीं हुए। वे हिंसा को एक क्षण के लिए भी बर्दाश्त करने को तैयार नहीं थे। उनकी दृढ़ता कमाल की थी। जब उन्होंने महसूस किया कि ब्रिटिश सरकार अपने वादे के मुताबिक भारत को आजादी देने में हीलाहवाली कर रही है तो उन्होंने भारतीयों को टैक्स देने के बजाए जेल जाने का आह्नान किया। विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का आंदोलन चलाया। ब्रिटिश सरकार द्वारा नमक पर टैक्स लगाए जाने के विरोध में दांडी यात्रा की और समुद्र तट पर नमक बनाया। उनकी दृढ़ता को देखते हुए उनके निधन पर अर्नोल्ड टोनी बी ने अपने लेख में उन्हें पैगंबर कहा। प्रसिद्ध वैज्ञानिक आइंस्टीन का यह कथन लोगों के जुबान पर है कि आने वाले समय में लोगों को सहज विश्वास नहीं होगा कि हांड़-मांस का एक ऐसा जीव था जिसने अहिंसा को अपना हथियार बनाया। हिंसा भरे वैश्विक माहौल में गांधी के विचारों की ग्राहयता बढ़ती जा रही है। जिन अंग्रेजों ने विश्व के चतुर्दिक हिस्सों में युनियन जैक को लहराया और भारत में गांधी की अहिंसा को चुनौती दी, आज वे भी गांधी के अहिंसात्मक आचरण को अपनाने की बात कर रहे हैं। विश्व का पुलिसमैन कहा जाने वाला अमेरिका जो अपनी धौंस-पट्टी से विश्व समुदाय को उपदेश देता है अब उसे भी लगने लगा है कि गांधी की विचारधारा की राह पकड़कर ही विश्व में शांति स्थापित की जा सकती है। सच तो यह है कि गांधी के शाश्वत मूल्यों की प्रासंगिकता बढ़ी है। गांधी अहिंसा के न केवल प्रतीक भर हैं बल्कि मापदण्ड भी हैं जिन्हें जीवन में उतारने की कोशिश हो रही है। अभी गत वर्ष पहले ही अमेरिका पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ह्वाइट हाउस में अफ्रीकी महाद्वीप के 50 देशों के युवा नेताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि आज के बदलते परिवेश में युवाओं को गांधी जी से प्रेरणा लेने की जरुरत है। गत वर्ष पहले अमेरिका की प्रतिष्ठित टाइम पत्रिका ने महात्मा गांधी की अगुवाई वाले नमक सत्याग्रह को दुनिया के सर्वाधिक दस प्रभावशाली आंदोलनों में शुमार किया। याद होगा अभी कुछ साल पहले जाम्बिया के लोकसभा सचिवालय द्वारा विज्ञान भवन में संसदीय लोकतंत्र पर एक सेमिनार आयोजित किया गया जिसमें राष्ट्रमंडल देशों के लोकसभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों ने शिरकत की। जाम्बिया की नेशनल असेम्बली के अध्यक्ष असुमा के. म्वानामवाम्बवा ने इस सम्मेलन के दौरान गांधी के सिद्धान्तों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और कहा कि भारत के साथ हम भी महात्मा गांधी की विरासत में साझेदार हैं। उन्होनें बताया कि अहिंसा के बारे में गांधी जी की शिक्षाओं ने जाम्बिया के स्वतंत्रता आन्दोलन को बेहद प्रभवित किया। सच तो यह है कि अब गांधी के वैचारिक विरोधियों को भी लगने लगा है कि गांधी के बारे में उनकी अवधारणा संकुचित थी। उन्हें विश्वास होने लगा है कि गांधी के नैतिक नियम पहले से कहीं और अधिक प्रासंगिक और प्रभावी हैं और उनका अनुपालन होना चाहिए। गांधी जी राजनीतिक आजादी के साथ सामाजिक-आर्थिक आजादी के लिए भी चिंतित थे। समावेशी समाज की संरचना को कैसे मजबूत आधार दिया जाए उसके लिए उनका अपना स्वतंत्र चिंतन था। उन्होंने कहा कि जब तक समाज में विषमता रहेगी, हिंसा भी रहेगी। हिंसा को खत्म करने के लिए विषमता मिटाना जरुरी है। विषमता के कारण समृद्ध अपनी समृद्धि और गरीब अपनी गरीबी में मारा जाएगा। इसलिए ऐसा स्वराज हासिल करना होगा, जिसमें अमीर-गरीब के बीच खाई न हो। शिक्षा के संबंध में भी उनके विचार स्पष्ट थे। उन्होंने कहा है कि मैं पाश्चात्य संस्कृति का विरोधी नहीं हूं। मैं अपने घर के खिड़की दरवाजों को खुला रखना चाहता हूं जिससे बाहर की स्वच्छ हवा आ सके। लेकिन विदेशी भाषाओं की ऐसी आंधी न आ जाए कि मैं औंधें मुंह गिर पड़ूं। गांधी जी नारी सशक्तीकरण के प्रबल पैरोकार थे। उन्होंने कहा कि जिस देश अथवा समाज में स्त्री का आदर नहीं होता उसे सुसंस्कृत नहीं कहा जा सकता। आज के दौर में भारत ही नहीं बल्कि विश्व समुदाय को भी समझना होगा कि उनके सुझाए रास्ते पर चलकर ही एक समृद्ध, सामथ्र्यवान, समतामूलक और सुसंस्कृत विश्व का निर्माण किया जा सकता है। आधुनिक भारतीय चिंतन प्रवाह में गांधी के विचार सार्वकालिक हैं। सच तो यह है कि गांधी भारतीय उदात्त सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत के अग्रदूत के साथ-साथ सहिष्णुता, उदारता और तेजस्विता के प्रमाणिक तथ्य हैं। सत्यशोधक संत भी हैं तो शाश्वत सत्य के यथार्थ समाज वैज्ञानिक भी। राजनीति, साहित्य, संस्कृति, धर्म, दर्शन, विज्ञान और कला के अद्भूत मनीषी भी तो मानववादी विश्व निर्माण के आदर्श मापदण्ड भी। सम्यक प्रगति मार्ग के चिंह्न भी तो भारतीय संस्कृति के परम उद्घोषक भी। गांधी के लिए वेद, पुराण एवं उपनिषद का सारतत्व ही उनका ईश्वर है और बुद्ध, महावीर की करुणा ही उनकी अहिंसा है। सत्य, अहिंसा, ब्रहमचर्य, अस्तेय, अपरिग्रह, शरीर श्रम, आस्वाद, अभय, सर्वधर्म समानता, स्वदेशी और समावेशी समाज निर्माण की परिकल्पना ही उनके जीवन का परम लक्ष्य है।
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बालयति बाबा भुमण शाह जी उदासीन - Kamboj Society
Baba Bhuman Shah
बालयति बाबा भुमण शाह जी उदासीन
बाबा भुम्मन शाह, (जिन्हें बाबा भुम्मनशाह, जन्म भूमिया के नाम से भी जाना जाता है) को भारत के शीर्ष उदासी संतों में गिना जाता है। उनका जन्म 14 अप्रैल, 1687 ई. को बहलोलपुर गाँव, दीपालपुर तहसील, ओकरा ज़िला, पंजाब (पाकिस्तान) में हुआ था, जो कथित तौर पर कम्बोज वंश के थे।
उनके पिता चौधरी हस्सा राम नम्बरदार और बहलोलपुर के एक प्रसिद्ध जमींदार थे। हस्सा राम और उनकी पत्नी माता राजो बाई को धार्मिक रूप से जाना जाता था और वे गुरु नानक के भक्त होने के साथ-साथ उदासी पंथ के संस्थापक भी थे।
कई किंवदंतियों और मिथक हैं जो भूमिया के प्रारंभिक बचपन से जुड़े हुए हैं। कहानी यह है कि एक बार एक बच्चे के रूप में, जब वह अपने पालने में सो रहा था, तो एक कोबरा आया और उसकी छाती के ऊपर बैठ गया और अपने हुड को फैला दिया। मदर राजो दृश्य में दंग रह गई, लेकिन जब उसने पालने के पास जाने की हिम्मत की, तो कोबरा धीरे-धीरे गायब हो गया और सोते हुए बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। एक अन्य मिथक मृत गौरैया के पुनरुद्धार से संबंधित है; और फिर भी एक गरीब किसान की खोई हुई फसल को स्वास्थ्य के लिए बहाल करने से संबंधित है। ये चमत्कार होने के लिए ले जाया गया और दूर-दूर से आए लोगों ने भौमिया के घर पर भीड़ जमा करना शुरू कर दिया। भूमिया सात साल की उम्र में अपनी स्कूली शिक्षा के लिए चली गईं। वह बहुत तेज और बुद्धिमान छात्र था और बहुत कम उम्र में हिंदू धर्म, सिख धर्म और इस्लाम की अनिवार्यताओं को पूरा करता था। अपने धार्मिक पाठों में भाग लेने के अलावा, भूमिया ने अपने गाँव के अन्य लड़कों की संगति में गायों को चराने जैसे सांसारिक कार्य भी किए। वह अपनी गायों को जंगल में ले जाता था, जहाँ वह तपस्वियों, संतों, गरीबों और अनाथों सहित राहगीरों के लिए एक मुफ्त-रसोई (लंगर) चलाने के लिए भरपूर भोजन और जल (जल) भी ले जाता था। थोड़ी देर बाद, परिवार बहलोलपुर से दीपालपुर की ओर चला जाता था। जय जय बाबा भुमन शाह जी
दीक्षा पंद्रह वर्ष की आयु तक, भूमिया ने एक भिक्षु बनने की तीव्र आकांक्षा विकसित कर ली थी। अपने माता-पिता की अनुमति के साथ, उन्होंने उदपंत पंथ के प्रमुख संत, पाकपट्टन के बाबा प्रीतम दास से संपर्क किया, जिन्होंने उन्हें गुरु-मंत्र में दीक्षा दी। औपचारिक रूप से बाबा प्रीतम दास द्वारा आरंभ और बपतिस्मा लेने पर, भूमिया स्वयं बाबा भूमण शाह बन गए। इसके तुरंत बाद, उन्होंने उन धार्मिक संदेशों का प्रचार करना शुरू कर दिया जो हमेशा कीर्तन और फ्री-किचन (लंगर) के साथ होते थे। ऐसा कहा जाता है कि गांव कुतुब कोट के एक मुस्लिम राजपूत जमींदार चौधरी लाखा वट्टू को कुछ कारणों से गिरफ्तार किया गया था और पंजाब के राज्यपाल के आदेश से लाहौर में सलाखों के पीछे डाल दिया गया था। बीबी बख्तावर, लक्खा की माँ, बाबा की कट्टर भक्त थीं। उसने अपने बेटे की रिहाई के लिए बाबा के आशीर्वाद का आग्रह किया और ऐसा हुआ कि चौधरी लाखा को कुछ दिनों के भीतर जेल से रिहा कर दिया गया। परिणामस्वरूप, लट्टू और वट्टू जनजाति के कई मुस्लिम रिश्तेदार भी बाबा के समर्पित अनुयायी बन गए। इसके अलावा, जनजाति ने बाबा के लिए कुतुब-कोट नाम के एक गाँव को भी आत्मसमर्पण कर दिया, जो बाद में उनकी धार्मिक गतिविधियों का केंद्र बना।
जिंदगी का कार्य
बाबा भुम्मन शाह ने प्रेम, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, सार्वभौमिक भाईचारा, धार्मिक-सहिष्णुता और समानता के अपने संदेश का प्रचार करने के लिए गांव-गांव की यात्रा की। उनके कई संप्रदायों के अनुयायी थे जिनमें हिंदू, सिख और मुस्ले शामिल थे। बाबा ने सूफी संत बाबा फरीद की दरगाह, अमृतसर में स्वर्ण मंदिर, और अपने धार्मिक यात्रा के दौरान कई अन्य सिख और हिंदू मंदिरों की भी यात्रा की। गाँव कुतुब-कोट में, जो बाद में डेरा बाबा भुम्मन शाह के नाम से प्रसिद्ध हुआ, बाबा ने स्थायी रूप से कीर्तन और मुफ्त रसोई (लंगर) की मर्यादा स्थापित की। बाबा भी गुरु गोविंद सिंह के बहुत समर्पित सिख थे। यह बताया जाता है कि एक बार, दशमेश गुरु और उनके सिख अनुयायी निली बार जा रहे थे, जब वे बाबा भुम्मन शाह से मिलने गए और लंगाह को डेरा में ले गए; शाह के नेक मिशन से खुश होकर, गोबिंद सिंह ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि उनका लंगर किसी भी तरह की कमी के साथ बढ़ता रहेगा।
50 से अधिक वर्षों के लिए अपने धार्मिक मिशन को पूरा करने के बाद, 1762 ई. में बाबा की मृत्यु हो गई. उन्हें महंत निर्मल चंद ने सफल बनाया जिन्होंने अपना काम जारी रखा। छठे महंत बाबा दर्शन दास के समय में, एक ब्रिटिश संभागीय आयुक्त ने डेरा का दौरा किया। महंत के व्यक्तित्व के साथ-साथ डेरा-परिसर और मुफ्त-रसोई सेवा (लंगर) से प्रभावित होकर आयुक्त ने तीर्थस्थल (संत चंद्र स्वामी) द्वारा बाबा भुम्मनशाह को 3000 एकड़ (12 किमी²) कृषि भूमि संलग्न की। श्राइन के नाम पर कुल जमीन-जायदाद 18,000 एकड़ (73 किमी of) कृषि भूमि (cf: 18700 एकड़ (76 km in) शेखूपुरा में गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब) के नाम से अच्छी हो गई. उतरा संपत्ति के अलावा, डेरा के नाम पर अन्य चल / अचल संपत्ति थी।
विभाजन के बाद का दृश्य
विभाजन के बाद, राजनीति की मजबूरियों के कारण, डेरा के मुख सेवक महंत गिरधारी दास ने अपना धार्मिक मुख्यालय पाकिस्तान से भारत में स्थानांतरित कर दिया। हरियाणा के सिरसा जिले के संगर साधा में एक नया तीर्थ और डेरा स्थापित किया गया था। पाकिस्तान से डेरा को हस्तांतरित कुल भूमि 18 से अधिक की तुलना में 1600 एकड़ (6.5 किमी compared) थी । महंत गिरधारी दास की मृत्यु के बाद, बाबा महंत अमर नाथ बावा संगर साधा में तीर्थ के महंत थे। वर्तमान में बाबा ब्रह्म दास महंत (गद्दीनशीन) हैं। महंत बाबा ब्रह्मा दास जी, डेरा बाबा भुम्मनशाह जी संगर सरिस्ता (सिरसा) के 12 वें महंत हैं। संगर साधा के अलावा, बाबा के हिंदू भक्तों ने उत्तर भारत के कई राज्यों में भी उनकी स्मृति में कई मंदिरों का निर्माण किया है, जहाँ प्रतिदिन बाबाजी की पूजा विश्वास और प्रेम (संत चंद्र स्वामी द्वारा बाबा भुम्मनशाह) के साथ की जाती है। पाकिस्तान में, इस डेरा को विभाजन से पहले के समय में इससे जुड़ी सबसे बड़ी संपत्ति के साथ सबसे अमीर माना जाता था। बाबा भुम्मनशाह की आध्यात्मिक और व्यावहारिक शिक्षाओं को उनके उत्साही भक्त, संत चंद्रा स्वामी द्वारा एक पुस्तिका में उपाख्यानों के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें जीवन के सच्चे लक्ष्य के साथ-साथ अपनी उपलब्धि के लिए सही साधनों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। ये उपदेश बाबा के अपने दिव्य जीवन के साथ पूर्ण सहमति में हैं। |
World Cup 2019: इंग्लैंड में ये मैदान है भारत के लिए सोने पे सुहागा, जहां भारत हमेशा है जीता - India TV Hindi News
Hindi News खेल क्रिकेट World Cup 2019: इंग्लैंड में ये...
World Cup 2019: इंग्लैंड में ये मैदान है भारत के लिए सोने पे सुहागा, जहां भारत हमेशा है जीता
ऐजबस्टन में भारत का मुकाबला अपने इस चिर प्रतिद्वंद्वी से नहीं बल्कि मेजबान इंग्लैंड (30 जून) और बांग्लादेश (दो जुलाई) से होगा।
Bhasha 24 May 2019, 17:24:57 IST
नई दिल्ली। विश्व कप के प्रबल दावेदारों में शामिल भारत ब्रिटेन में 30 मई से शुरू होने वाले क्रिकेट महाकुंभ के लीग चरण के नौ मैच छह मैदानों पर खेलेगा जिनमें से बर्मिंघम का ऐजस्टबन भी शामिल है जहां उसका शानदार रिकार्ड रहा है।
भारत ने ऐजबस्टन में अब तक दस एकदिवसीय मैच खेले हैं जिनमें से सात में उसे जीत और केवल तीन में हार मिली है। उसने 2013 से यहां लगातार पांच मैच जीते हैं जिनमें पाकिस्तान के खिलाफ आईसीसी चैंपियन्स ट्राफी 2013 और 2017 में आठ विकेट और 124 रन की दो बड़ी जीत भी शामिल हैं।
लेकिन ऐजबस्टन में भारत का मुकाबला अपने इस चिर प्रतिद्वंद्वी से नहीं बल्कि मेजबान इंग्लैंड (30 जून) और बांग्लादेश (दो जुलाई) से होगा। इंग्लैंड के खिलाफ भारत ने यहां चार मैच खेले हैं जिनमें से तीन में उसे जीत मिली है। बांग्लादेश को भी भारत ने 2017 में इस मैदान पर नौ विकेट से करारी शिकस्त दी थी।
भारत अपने चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से 16 जून को ओल्ड ट्रैफर्ड, मैनचेस्टर में होगा जहां उसने 2007 के बाद कोई वनडे नहीं खेला है। इस मैदान पर भारत ने आठ मैचों में से तीन में जीत दर्ज की और पांच में उसे हार मिली है। भारत ने हालांकि विश्व कप 1999 में पाकिस्तान को इस मैदान पर 47 रन से पराजित किया था।
मैनचेस्टर में भारत 27 जून को वेस्टइंडीज से भी भिड़ेगा। भारत ने 1983 विश्व कप के लीग चरण में इसी मैदान पर कैरेबियाई टीम को 34 रन से हराकर सनसनी फैला दी थी लेकिन इसके बाद दोनों टीमें कभी इस मैदान पर आमने सामने नहीं हुई।
विराट कोहली की टीम अपने अभियान की शुरुआत पांच जून को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रोज बाउल, साउथम्पटन पर करेगा जिसमें भारतीय रिकार्ड तीन मैचों में एक जीत और दो हार का है। भारत ने इस मैदान पर एकमात्र जीत 2004 में कीनिया के खिलाफ दर्ज की थी। दक्षिण अफ्रीका के अलावा अफगानिस्तान (22 जून) से भी भारत इसी मैदान पर भिड़ेगा।
आस्ट्रेलिया की कड़ी चुनौती का सामना भारतीय टीम नौ जून को ओवल में करेगी। भारत ने इस मैदान पर सर्वाधिक 15 वनडे खेले हैं जिनमें से उसने केवल पांच में जीत दर्ज की है जबकि नौ मैच गंवाये हैं। एक मैच का परिणाम नहीं निकला। भारत और आस्ट्रेलिया के बीच यहां 1999 विश्व कप में मैच खेला गया था। आस्ट्रेलिया ने यह मैच 77 रन से जीता था।
भारतीय टीम न्यूजीलैंड (13 जून) से ट्रेंटब्रिज, नाटिंघम में और श्रीलंका (छह जुलाई) से हेडिंग्ले, लीड्स में भिड़ेगी। नाटिंघम में भारतीय टीम ने सात मैचों में से तीन में जीत और इतने ही मैचों में हार का सामना किया है। न्यूजीलैंड के खिलाफ भारतीय टीम ने हालांकि विश्व कप में इंग्लैंड में जो तीन मैच खेले हैं उनमें उसे हार मिली है। इनमें विश्व कप 1999 का इसी मैदान पर खेला गया मैच भी शामिल है।
लीड्स में भारतीय टीम दसवां मैच खेलने के लिये उतरेगी। उसने अभी तक इस मैदान पर नौ मैचों में से तीन में जीत दर्ज की है। भारत ने इस मैदान पर आखिरी जीत 2007 में दर्ज की थी। भारत और श्रीलंका लीड्स में पहली बार आमने सामने होंगे। |
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वैसे तो काले चने बहुत सारे पौष्टिक तत्वों से भरपूर होता है लेकिन अंकुरित होने के बाद स्वादिष्ट होने के साथ-साथ इनसे मिलने वाले प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन की मात्रा और भी ज्यादा हो जाती है।
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एक स्वस्थ जीवन बिताने के लिए पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन के अलावा भी कई पोषक तत्व हैं जिनका सेवन हमें रोज करना चाहिए। |
पश्चिम बंगाल में पाकिस्तान विरोध पर मनाही, सेमिनार रद्द | Perform India
Home पश्चिम बंगाल विशेष पश्चिम बंगाल में पाकिस्तान विरोध पर मनाही, सेमिनार रद्द
क्या आपको पता है कि भारत में एक राज्य ऐसा भी है जहां आप पाकिस्तानी आतंकी हमले, कश्मीर में घुसपैठ सहित उसके दूसरे हथकंडों का विरोध नहीं कर सकते। जी हां, हम बात कर रहे हैं पश्चिम बंगाल के बारे में। यहां अगर आप पाक की करतूतों के बारे में कोई विरोध प्रदर्शन, सभा, सेमिनार या रैली करना चाहेंगे तो आपको उसकी इजाजत नहीं मिलेगी। इसकी जगह किसी पाकिस्तानी जिसका विरोध सारा देश कर रहा हो, यहां स्वागत किया जाता है। पाक आतंकी हमले में बाद जब देश भर में गुलाम अली का कार्यक्रम विरोध हो रहा था तो ममता बनर्जी ने उन्हें कोलकाता बुलाकर कार्यक्रम करने की इजाजत दी। लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने यहां कश्मीर और बलूचिस्तान के मुद्दे पर पाक विरोधी सेमिनार करने की इजाजत नहीं दी। पाकिस्तानी मूल के तारिक फतेह कोलकाता में पाक विरोधी सेमिनार करने जा रहे थे।
तारिक फतेह पाकिस्तानी मूल के लेखक, चिंतक और विश्लेषक हैं। वे सात जनवरी को कलकत्ता क्लब में ‘द सागा ऑफ बलूचिस्तान’ नाम से एक कार्यक्रम करने जा रहे थे। लेकिन कलकत्ता क्लब ने हाथ खड़े करते हुए कार्यक्रम को रद्द कर दिया।
– @KolkataPolice on urging of CM @MamataOfficial forces @TheCalcuttaClub to shut talk on #Kashmir #Balochistan. @GeneralBakshi @neelakantha pic.twitter.com/ZQYnR9Cwsr
क्लब की ओर से चार जनवरी को कार्यक्रम रद्द करने के बारे में तारिक फतेह को एक मेल किया गया। मेल में कहा गया है कि एक निजी सामाजिक क्लब होने के नाते हम क्लब में सौहर्दपूर्ण माहौल चाहते हैं। जबकि तारिक फतेह ने ट्वीट कर कहा है कि पुलिस और पश्चिम बंगाल सरकार के दबाव के चलते क्लब ने कार्यक्रम को रद्द किया है। तारिफ फतेह ने आरोप लगाया है कि ममता सरकार ने पहले कार्यक्रम के पोस्टर ने कश्मीर शब्द हटाने को कहा था। जिसके ना करने पर कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया।
कार्यक्रम स्वाधिकार बांग्ला फाउंडेशन की ओर से आयोजित होना था। यह कार्यक्रम बलूचिस्तान और कश्मीर आधारित एक टॉक शो था। इस कार्यक्रम में तारिक फतेह के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान, पूर्व सैन्य अधिकारी जीडी बख्शी, कश्मीरी मूल के सुशील पंडित शामिल होने वाले थे।
ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल का पूरी तरह से इस्लामीकरण कर दिया है। यहां अगर आप किसी दंगे का शिकार हुए हैं और हिंदू हैं तो आपको ना तो मुआवजा मिलेगा ना राहत और ना पुलिस सुरक्षा। यहां वोटबैंक के लिए बांग्लादेशी मुसलमानों का स्वागत किया जाता है और वही मुसलमान यहां आकर स्थानीय हिंदूओं पर जुल्म करता है। ताजा उदाहरण धूलागढ़ का है। कोलकाता से सिर्फ 36 किलोमीटर दूर है। यहां मुस्लिमों ने हिंदुओं के घर, दुकान और धार्मिक प्रतिष्ठानों को जमकर निशाना बनाया। आगजनी और लूटपाट की लेकिन पुलिस दर्शक बनी खड़ी रही।
सवाल उठता है कि क्या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राजनीतिक हताशा की शिकार हो गई हैं? इसके पहले नोटबंदी के दौरान पटना से कोलकाता आते वक्त प्लेन लैंडिग में जरा सी देरी होने पर भड़क उठीं और हत्या की साजिश करने का आरोप लगा बैठीं। उसके बाद कोलकाता में राज्य सचिवालय के पास और कई और जगहों पर सेना की तैनाती पर खफा हो गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि सेना की तैनाती तख्ता पलट के लिए की गई। लेकिन सेना की मौजूदगी नियमित अभ्यास का हिस्सा भर थी।
पश्चिम बंगाल में हिंदू समुदाय इस समय दहशत की जिदंगी जी रहे है। ममता बनर्जी के खुले समर्थन के चलते अल्पसंख्यक समुदाय पूरी तरह से बेकाबू हो चुका है। पुलिस भी मूकदर्शक की भूमिका निभा रही है।
हर किसी को बस हर पल यही डर समा रहा है कि ना जाने कब उनके घर को जला दिया और सबकुछ लूट लिया जाए। इस डर के साए में जीने की मुख्य वजह है पश्चिम बंगाल में योजनाबद्ध तरीके से हो रहे दंगे, जिसे ममता बनर्जी का पूरा समर्थन प्राप्त है।
ममता के शासन में दंगे जिन्हें ममता दबा नहीं पाई
13 दिसंबर 2016 में मालदा जिले में मिलाद-उन-नबी के अगले दिन कुछ मुस्लिम युवकों ने हिन्दुओं के घरों और दुकानों में आग लगा दी।
12 अक्टूबर 2016 को हिंसा की शुरुआत पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना ज़िले से हुई, जहां कथित तौर पर मुहर्रम के जुलूस के दौरान भड़की हिंसा में हिंदुओं के घरों को जला दिया और इस हिंसे की आग 5 ज़िलों में फैल गई।
3 जनवरी 2016 को बंगाल की एनएच 34 पर तकरीबन 2.5 लाख मुस्लिम इकट्ठा हुए। जिन्होंने कालियाचक पुलिस स्टेशन पर हमला कर दिया और पूरे इलाके में दर्जनों गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया।
पश्चिम बंगाल के कैनिंग जिला में 19 फरवरी, 2013 में दंगा भड़का क्योंकि ये लोग अलग इस्लामी राज्य की मांग कर रहे थे। इस दंगे में 200 से ज्यादा हिंदुओं के घरों को सुनियोजित तरीके लूटा गया और बड़ी संख्या में मंदिरों को नुकसान पहुंचाया गया। यहां तक पुलिस ने हिंदुओं की मदद के लिए फोन नही उठाए
कोलकाता उपनगर के उस्ती बाजार को भी 2013 में मुस्लिमों द्वारा निशाना बनाया गया जिसमें 50 से ज्यादा हिंदू दुकानों को लूट लिया गया। उल्टा पुलिस ने पीड़ित हिंदुओं को ही हिरासत में ले लिया और दंगाई मुस्लिम खुले-आम घुमते रहे
14 मई 2012 को दक्षिण 24 परगना जिले के तारनगर और रूपनगर दो गांवों में जमकर हिंसा हुई और हिंदू परिवारों के घरों को मुस्लिम दंगाईयों ने आग के हवाले कर दिया।
एक नजर बंगाल की आबादी के बिगड़ते समीकरण पर!
1947 में हिंदुस्तान का विभाजन हुआ, बांग्ला बोलने वाले मुस्लिमों में कुछ भारत के हिस्से में रह गए और बाकी आज के बांग्लादेश के हिस्से में आए।
1947 में पश्चिम बंगाल में 12 फीसदी मुस्लिम आबादी थी।
50 हजार रोहिंग्या मुसलमान म्यामांर छोड़कर बांग्लादेश की सीमा पर डेरा डाले हुए है।
आज पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों की संख्या 27 फीसदी के पार पहुंच गई है।
1947 में आज के बांग्लादेश में 27 फीसदी हिंदुओं की संख्या थी।
आज बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी घटकर 8 फीसदी रह गई है।
जिस तरह से पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है उसे देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पश्चिम बंगाल को दूसरा बांग्लादेश बनाने की पूरी तैयारी ममता बनर्जी ने कर ली है और देश ने हिंदुओं के साथ हो रही बर्बरता पर चुप्पी साध ली है।
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वीडियो : “राम के नाम” – जानिए, क्या हुआ था 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में??? | My Zavia Generic Pharnacy India
Home अयोध्या वीडियो : “राम के नाम” – जानिए, क्या हुआ था 6 दिसंबर...
वीडियो : “राम के नाम” – जानिए, क्या हुआ था 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में???
नई दिल्ली। अयोध्या में बाबरी मस्जिद/राम मंदिर विवाद ने तब एक बड़ा मोड़ ले लिया था जब 6 दिसंबर 1992 को लाखों की भीड़ ने बाबरी मस्जिद गिरा दिया। उस वक्त उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार थी और कल्याण सिंह मुख्यमंत्री थे।
पांच दिसंबर 1992 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के एक बयान ने हवा का रुख बदल दिया। उन्होंने कहा था, ‘’उस जगह को समतल तो करना पड़ेगा।’’
वीडियो (फेसबुक):
वाजपेयी के इस भाषण के अगले ही दिन अयोध्या में लाखों कारसेवकों की भीड़ जुट चुकी थी। इस भीड़ के साथ-साथ बीजेपी, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के तमाम नेता बाबरी मस्जिद के पास बने मंच पर मौजूद थे।
उस दिन सुबह करीब 11 बजे कुछ कारसेवक बाबरी मस्जिद के आसपास बनी रेलिंग को फांदकर अंदर घुसने की कोशिश करने लगे। अंदर तैनात पीएसी के जवानों ने उन्हें रोका तो उन पर पथराव शुरू हो गया। किसी के हाथ में फावड़े तो कोई हथौड़े लेकर बाबरी मस्जिद विवादित ढांचे की तरफ बढ़ा चला जा रहा था।
वीडियो (यू ट्यूब):
यही नहीं बाबरी मस्जिद को गिराने के लिए बड़ी-बड़ी रस्सियों का इंतजाम भी पहले से कर लिया गया था। इतनी तैयारी के साथ आई कारसेवकों की भीड़ में से कुछ लोग जल्द ही गुंबद तक पहुंच गए और फिर देखते ही देखते गुंबद को गिरा दिया गया।
दरअसल छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में जो हुआ उसकी नींव 1990 में आडवाणी की रथयात्रा से ही पड़ गई थी। तब ये नारा दिया गया था कि ‘कसम राम की खाते हैं मंदिर वहीं बनाएंगे’ यानी जहां बाबरी मस्जिद है वहीं पर मंदिर बनेगा।
अयोध्या बाबरी मस्जिद/राम जन्मभूमि विवाद को लेकर आज से सुप्रीम कोर्ट में सबसे बड़ी सुनवाई:
अयोध्या मामले में आज यानी मंगलवार 5 दिसम्बर 2017 दोपहर 2 बजे सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होगी ये अहम इस लिए भी है कि कोर्ट खुद कह चुकी है कि अब सुनवाई टलेगी नहीं। 7 साल से लंबित यह मामले में 20 पिटीशंस और 90 हजार पेज में गवाहियां दर्ज हैं।
30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने विवादित 2.77 एकड़ जमीन 3 बराबर हिस्सों में बांट दी थी। अदालत ने रामलला की मूर्ति वाली जगह रामलला विराजमान को दी। सीता रसोई और राम चबूतरा निर्माेही अखाड़े को और बाकी हिस्सा मस्जिद निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया गया।
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुन्नी वक्फ बोर्ड 14 दिसंबर 2010 को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। फिर एक के बाद एक 20 पिटीशंस दाखिल हो गईं। सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया, लेकिन सुनवाई शुरू नहीं हुई। इस दौरान 7 चीफ जस्टिस बदले। सातवें चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने इस साल 11 अगस्त को पहली बार पिटीशंस लिस्ट की।
ये होंगे पैनल जज:
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा:
3 तलाक खत्म करने और सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने जैसे फैसले सुना चुके हैं।
जस्टिस अब्दुल नाजिर:
तीन तलाक बेंच में थे। प्रथा में दखल गलत बताया था। प्राइवेसी को फंडामेंटल राइट करार दिया था।
जस्टिस अशोक भूषण:
दिल्ली सरकार अौर एलजी के बीच जारी अधिकारों की जंग के विवाद पर सुनवाई कर रहे हैं।
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“कोई सर्जिकल स्ट्राइक्स नहीं हुईं” – पाकिस्तानी सेना
ब्रेकिंग न्यूज़ : “जम्मू-कश्मीर में भाजपा ने समर्थन लिया वापस, महबूबा... |
बाइट--01-- जगराम (ग्रामीण श्रृद्धालु)
मेले में सदगुरु महराज के शिष्यों ने पहले साधू संतो को भोजन कराया गया फिर उन्हें भेंट में कम्बल दिया गया। वहीं इस अवसर पर जलौन के सांसद भानू प्रताप वर्मा भी मौजूद रहें और उन्होंने मीडिया से बातचित करते हुए कहा कि इस मेले में हम आते हैं क्योंकि सदगुरू महाराज में हमारी आस्थाह है।
बाइट--02-- भानू प्रताप वर्मा (सांसद जालौन)
आपको बता दें कि हर साल सदगुरु महराज की समाधी स्थल पर विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। जहां देश-विदेश से सदगुरु महराज के भक्त पहुंचकर पुजा-अर्चना करते हैं । |
terror plan to attack in punjab and jammu and kashmir Ludhiana Live news
Home Hindi पंजाब और जम्मू-कश्मीर में बड़े हमले की फिराक में आतंकी
पंजाब और जम्मू-कश्मीर में बड़े हमले की फिराक में आतंकी
जानकारी के मुताबिक आतंकी संगठन अंसार गजावत-उल-हिंद का सरगना जाकिर मूसा जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की भर्ती कर रहा है। इतना ही नहीं, जाकिर मूसा अपने डिप्टी रेहान के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर और पंजाब के पुलिस कर्मियों पर फिदायीन हमले की तैयारी कर रहा है। आतंकी रेहान ने हमले की तैयारियों को लेकर पंजाब और जम्मू में पुलिस के दफ्तरों की कई जगहों की रेकी की है।
खुफिया एजेंसियों ने सरकार को भेजी अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि जम्मू कश्मीर में लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के नजदीक 10 आतंकियों की मूवमेंट देखी गई है। ऐसा बताया जा रहा है कि ये सभी आतंकी कश्मीर में बड़े हमले की फिराक में है और इसके लिए वो भारत में घुसपैठ का इंतजार कर रहे हैं ये आतंकी लश्कर और जैश के बताए जा रहे हैं। खुफिया एजेंसियों की इस रिपोर्ट के बाद से लाइन ऑफ कंट्रोल पर सुरक्षा बलों को अलर्ट रहने को कहा गया है यही नहीं अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में लगे ITBP CRPF आर्मी और जम्मू-कश्मीर पुलिस से भी कड़ी निगरानी रखने को कहा गया है।
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद भारत पर बड़े आतंकी हमले ना कर पाने से बौखलाई हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को ISI की मदद से भारतीय नौसेना के बेस पर आतंकी हमले की ट्रेनिंग दी जा रही है जैश ए मोहम्मद के आतंकियों को गहरे पानी में गोताखोरी से लेकर के हथियार चलाने की ट्रेनिंग मिल रही है ताकि वह पठानकोट जैसा एक और बड़े हमले को अंजाम दे सके।
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फिरोजपुर। बाप से लेकर बेटे तक सीमा पार से आ रही हेरोइन की तस्करी से जुड़े हैं। जेल में बंद होने के बावजूद तस्कर अपने बेटों के माध्यम से पाकिस्तानी तस्करों से संपर्क साधे हुए हैं। इस बात का खुलासा जलालाबाद के गांव जोधा भैणी में पकड़े गए तस्कर तिलक सिंह से हुआ है। तस्करी के धंधे को पूरे परिवार ने एक बिजनेस की तरह अपना लिया है। सीमावर्ती गांव के कई परिवार इस धंधे से जुड़ हैं। पाकिस्तानी तस्कर इन्हें त्योहारों पर तोहफे भी भेजते हैं। उधर, जलालाबाद थाना सदर के प्रभारी हरदीप सिंह ने बताया कि पकड़ा गया तस्कर तिलक सिंह कई बार फेंसिंग पार खेतों में कामकाज के बहाने अपनी बैलगाड़ी में हेरोइन छिपाकर ला चुका है। ये बात उसने पूछताछ के दौरान स्वीकार की है। सिंह ने बताया कि जेल में बंद तस्कर सुलखन सिंह, मक्खन सिंह और कश्मीर सिंह के साथ तिलक के गहरे रिश्ते हैं। जेल में बंद तस्करों के निर्देशों पर सरहद पार से आने वाली हेरोइन की तस्करी की जा रही है। एसएचओ हरदीप सिंह ने बताया कि जिस समय तिलक सरहद पर पकड़ा गया था, उस समय उसके साथ गांव जोधा भैणी निवासी जोगिंदर सिंह पुत्र कश्मीर सिंह व भोला सिंह भी था, लेकिन वहां से दोनों फरार होने में कामयाब हो गए। सिंह ने बताया कि तस्कर कश्मीर सिंह का एक बेटा अविनाश सिंह भी पाकिस्तानी सिम कार्ड रखने के आरोप में जेल में बंद है। जोगिंदर सिंह अपने पिता के इशारे पर हेरोइन तस्करी का धंधा संभाले हुए है। कश्मीर का पूरा परिवार पाकिस्तानी तस्करों से मिलकर हेरोइन, जाली करेंसी व असलाह की तस्करी करता है। |
हरियाणवी कविता: सन ब्यालीस मैं हे फौजी नै / रणवीर सिंह दहिया – म्हारा हरियाणा |
NewsCode Jharkhand | 7 July, 2018 9:37 PM
रांची। राज्य के नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने झाविमो प्रमुख बाबूलाल मरांडी द्वारा जारी पत्र को फर्जी बताया कि इस तरह के आरोप लगाने वालों को शर्म आनी चाहिए। नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने जानना चाहा कि क्या बाबूलाल मरांडी को महाभारत के संजय की तरह दिव्य दृष्टि प्राप्त हो गई थी।
साथ ही बाबूलाल जिस चिट्ठी की बात कर रहे हैं क्या उसकी सत्यता सिद्ध कर पाएंगे। मंत्री ने कहा कि ऐसे में तो कल कोई भी व्यक्ति किसी पर भी कोई भी आरोप लगा दे सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप लगाने से पहले थोड़ी शर्म जरुर आनी चाहिए।
रांची : जनता के सामने भाजपा का असली चेहरा उजागर- झाविमो
सीपी सिंह ने बाबूलाल मरांडी को चुनौती देते हुए जांच कराने की बात कही। उन्होंने कहा कि जांच का सामना करने के लिए उनकी पार्टी तैयार है। मंत्री ने कहा कि इस तरह किसी का चरित्र हनन करना उचित नहीं है। हम भी किसी का चरित्र हनन कर सकते हैं मगर ये हमारी पार्टी का संस्कार नहीं है। इस तरह का काम संस्कारहीन व्यक्ति ही कर सकता है। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति में इस तरह के संस्कारहीन लोग हैं जो इस तरह के काम कर रहे हैं।
लातेहार : बोरे की दीवार और कागज के छत में रहती...
डेक्कन क्रोनिकल पर 30 करोड़ रुपये के घोटाले में मामला...
साहिबगंज : बुनियादी सुविधाओं का संकट है आदिम समुदाय के...
कटक टी-20 : टेस्ट, वनडे में श्रीलंका को धूल चटाने...
निरसा : बेकाबू कार ने हाइवा को मारी टक्कर, पांच... |
बैंडस्टैंड पर लगेगी राजेश खन्ना की मूर्ति | Webdunia Hindi
बैंडस्टैंड पर लगेगी राजेश खन्ना की मूर्ति
बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता राजेश खन्ना की पहली पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बांद्रा के बैंडस्टैंड पर यश चोपड़ा, देव आनंद और राज कपूर जैसी मशहूर हस्तियों के साथ उनकी मूर्ति स्थापित की जाएगी। पिछले वर्ष गंभीर बीमारी के बाद 69 वर्षीय अभिनेता का मुंबई में उनके घर ‘आर्शीवाद’ में 18 जुलाई को निधन हो गया था।
मनोरंजक चैनल यूटीवी स्टार्स राजेश खन्ना की अनोखी शैली और मनमोहक मुस्कान की याद में यहां बांद्रा के बैंडस्टैंड स्थित विहार स्थल में बॉलीवुड के आधिकारिक स्थान ‘वॉक ऑफ द स्टार’ में उनकी मूर्ति के अनावरण की योजना बना रही है।
बॉलीवुड के सुपरस्टार के परिवार के सदस्य उनकी प्रतिष्ठित मुद्रा को अमर करती इस कांसे की मूर्ति का फिल्म जगत की कुछ जानी मानी हस्तियों की मौजूदगी में अनावरण करेंगे।(भाषा)
सोनाक्षी सिन्हा की साइज जीरो में कोई रुचि नहीं
आलिया बनाना चाहती हैं रितिक की पेंटिंग
माधुरी के मोबाइल एप्लिकेशन को मिला अवॉर्ड
मेरा परिवार रुढ़ीवादी है : हुमा कुरैशी
करीना कपूर खान स्क्रीन पर दिखेगा अब यह नाम
बैंड स्टैंड |
प्रियंका वाड्रा ने चाय पर बुलाया तो अनिल बलूनी ने पहाड़ी व्यंजनों का तड़का लगाया – Breaking Uttarakhand
प्रियंका वाड्रा ने चाय पर बुलाया तो अनिल बलूनी ने पहाड़ी व्यंजनों का तड़का लगाया
July 27, 2020 breakinguttarakhand Breakinguttarakhand, देश विदेश, बड़ी खबर, राजनीतिक
प्रियंका वाड्रा ने चाय पर बुलाया तो अनिल बलूनी ने पहाड़ी व्यंजनों का तड़का लगाया When Priyanka Vadra called for tea, Anil Baluni spiced up the hill dishes
प्रियंका गांधी वाड्रा का 35 लोधी एस्टेट वाला बंगला राज्य सभा सांसद और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख भाजपा अनिल बलूनी को आवंटित किया जा चुका है। प्रियंका गांधी वाड्रा ने 35 लोधी एस्टेट के बंगले को छोड़ने से पहले बलूनी जी को चाय पर आमंत्रित किया
इसके प्रत्युत्तर में राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी ने पत्र लिख कर प्रियंका वाड्रा को उत्तराखंड के परम्परागत पहाड़ी भोजन पर आमंत्रित किया।
बताया गया कि बिना किसी सरकारी पद के प्रियंका गांधी २३ साल से इस बंगले पर अवैध रूप से काबिज थी इसलिए यह बंगला खाली करना पड़ा। लेकिन राजनेताओं की ऐसी नायाब आपसी कैमिस्ट्री से कार्यकर्ताओं को निश्चित रूप से सीख मिल सकती है।
Anil BaluniAnil Baluni spiced up the hill dishesbreakinguttarakhandPiryanka VadraWhen Priyanka Vadra called for teaअनिल बलूनीप्रियंका गांधी वाड्राप्रियंका गांधी वाड्रा ने चाय पर बुलाया तो अनिल बलूनी ने पहाड़ी व्यंजनों का तड़का लगायाब्रेकिंग उत्तराखंड डाट कामहरीश मैखुरी
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क्या रहा मनुष्य और उसके आविष्कारों के अनुसार, अब तक प्रारंग और जौनपुर का सफर | What-has-been-the-journey-of-Parang-and-Jaunpur-so-far-according-to-man-and-his-inventions
क्या रहा मनुष्य और उसके आविष्कारों के अनुसार, अब तक प्रारंग और जौनपुर का सफर
24-07-2020 08:00 AM
प्रारंग शहर की स्थानीय भाषा में विभिन्न शहरों/स्थानों की संस्कृति और प्रकृति पर हर रोज उपयोगी अंतर्दृष्टि प्रदान करके, संस्कृति - प्रकृति संतुलित करने का उद्देश्य रखता है। हम शहर विशेष की संस्कृति और प्रकृति के संदर्भ में दुनिया के अन्य हिस्सों के साथ शहर के संसर्गों पर शोध करते हैं और उन्हें प्रस्तुत करते हैं। प्रारंग के लेखों की रूपरेखा में, हमने प्रकृति और संस्कृति दोनों का ही निम्नलिखित 6 (प्रत्येक में 3) भागों के माध्यम से प्रतिनिधित्व किया है:
1. समयसीमा : इस बिंदु में पृथ्वी की शुरुआत से लेकर अब तक के समयकाल के बारे में बहुत से नये तथ्यों का पता चलेगा। हम दुनिया भर में सभ्यताओं के विकास के संश्रय में हमारे विशिष्ट शहर के विकास का पता लगाते हैं।
2. मानव व उनकी इन्द्रियाँ : शहर के संदर्भ को ध्यान में रखते हुए, हम मनोरंजन और संवर्धन की वस्तुओं और मानव आवश्यकता की गतिविधियों के विकास का पता लगाते हैं, जो ध्वनि, गंध, स्पर्श, स्वाद, दृष्टि और विचार के रूप में मानव अपनी इंद्रियों के माध्यम से अनुभव करते हैं।
3. मानव व उसके अविष्कार : हम दस्तकारी और औद्योगिक उत्पादों और सेवाओं में हुए आविष्कारों और नवाचारों का पता लगाते हैं, क्यूंकि इनके द्वारा ही दुनिया ने विभिन्न सभ्यताओं की वृद्धि देखी है।
1. भूगोल : प्रकृति के इस बिंदु में हम अपने शहर और विश्व के भूगोल के बारे में प्राप्त जानकारियों को संदर्भित करते हैं। यह भाग पृथ्वी पर मौजूद स्थानों की प्राकृतिक विषेशताओं पर रौशनी ड़ालता है जैसे नदियाँ, समुद्र, जंगल इत्यादि।
2. जीव–जन्तु : जीव-जन्तु प्रकृति का एक अहम हिस्सा होते हैं। प्रारंग के प्रकृति खण्ड के इस भाग में जानिए अपने शहर और विश्व भर में पाये जाने वाले जीव-जन्तुओं से जुडी रोचक जानकारी का वर्णन।
3. वनस्पति : पेड़-पौधों अथवा वनस्पति लोक का अर्थ, किसी क्षेत्र का वनस्पति जीवन या भूमि पर मौजूद पेड़-पौधे और इसका संबंध किसी विशिष्ट जाति, जीवन के रूप, रचना, स्थानिक प्रसार या अन्य वानस्पतिक या भौगोलिक गुणों से है।
1. म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण:
स्थानीय कुम्हारों को रोज़गार प्रदान करेगा कुल्हड़
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2. हथियार व खिलौने
जौनपुर में खेल सुविधाओं के निवेश में कमी
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3. य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला
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4. संचार एवं संचार यन्त्र
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5. घर- आन्तरिक साज सज्जा, कुर्सियाँ तथा दरियाँ
भदोही की कालीन बुनाई को प्राप्त है भौगोलिक संकेतक टैग
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6. वास्तुकला 1 वाह्य भवन
जौनपुर के विरासत स्थलों की स्थिति में आती गिरावट
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7. वास्तुकला 2 कार्यालय व कार्यप्रणाली
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8. नगरीकरण- शहर व शक्ति
जौनपुर में शहरी विकास का ग्रामीण विकास पर पड़ता प्रभाव
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9. सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)
लिंक -
10. सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान
क्या हम भूल गए हैं, जौनपुर से सम्बन्ध रखने वाले सिद्दी समुदाय को
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प्रारंग द्वारा आपके शहर में अब तक संस्कृति और प्रकृति से जुड़े 1000 से भी अधिक लेख प्रकाशित किये जा चुके हैं, तो आईये प्रारंग के संग, अपने शहर के विभिन्न रंगों का आनंद लेने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें। |
दाद (Ringworm) एक प्रकार चर्म रोग है। जिसे डर्माटोफायोटासिस या टिनिया भी कहा जाता है। इसका अगर सही समय पर इलाज नहीं किया गया तो यह एग्जिमा का रूप ले लेती है। जो कि दाद से ज्यादा खतरनाक त्वचा से जुड़ी बीमारी है।
जब मौसम बदलते हैं तो आपको स्किन से जुड़ी कई तरह की समस्याएं होती हैं। जैसे कि खुजली, दाग और दाद। दाद जिसे रिंगवॉर्म भी कहा जाता है, ये एक प्रकार का फंगल संक्रमण है जो आपकी त्वचा की ऊपरी परत पर विकसित होता है। आमतौर पर यह तीन तरह की फंगस के कारण होता है – ट्राइकोफिटन, माइक्रोस्पोरम और एपिडर्मोफिटन। दाद आपके शरीर पर कहीं भी हो सकता है, जैसे चेहरे, हाथ, पैर, जांघ, पीठ, छाती, उंगली आदि। आइए जानते हैं इसके प्रकार, होने के कारण, लक्षण और रोकथाम के कुछ सरल उपाय।
रिंगवॉर्म |
कम से कम कर्मचारियों के अनुबंध कार्यकाल का वरिष्ठता लाभ तो दिलाएं जयराम: राणा - rajendra rana
कम से कम कर्मचारियों के अनुबंध कार्यकाल का वरिष्ठता लाभ तो दिलाएं जयराम: राणा
Updated: 05 Sep, 2019 12:02 PM
सुजानपुर: भाजपा के चुनावी दृष्टि पत्र पर अमल न करने व कर्मचारियों को अनुबंध कार्यकाल के वरिष्ठता लाभ से वंचित रखने को लेकर सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा ने जयराम सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी हितैषी होने का ढिंढोरा पीटने वाली जयराम सरकार ने कदम कदम पर कर्मचारियों के साथ छल किया है और वायदे न निभाकर कर्मचारियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। आज यहां जारी एक बयान में राजेंद्र राणा ने कहा कि प्रदेश सरकार ने अपने वायदे के विपरीत कर्मचारियों को अनुबंध कार्यकाल की वरिष्ठता लाभ से भी वंचित रखा है, जबकि कमीशन के माध्यम से भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार ही भर्तियां की जाती हैं।
राजेंद्र राणा ने याद दिलाया कि वर्ष 2007 में भाजपा की तत्कालीन धूमल सरकार ने प्रदेश में 8 साल के अनुबंध कार्यकाल के आधार पर भर्ती करने का निर्णय लिया था तथा वर्ष 2009 में अधिसूचना जारी होते ही अनुबंध आधार पर पहली भर्ती की गई। वर्ष 2012 में सत्ता से जाते-जाते उन्होंने अनुबंध का कार्यकाल 6 साल करने की घोषणा की थी। उसके बाद कांग्रेस की वीरभद्र सिंह ने सत्ता में आने के बाद वर्ष 2014 में कर्मचारियों का अनुबंध कार्यकाल 5 साल तथा वर्ष 2016 में इसे घटाकर 3 साल कर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने अपने शासनकाल में कर्मचारियों को छलने व बरगलाने का ही काम किया है।
राणा ने कहा कि भाजपा की प्रदेश सरकारों के साथ केंद्र में रहते हुए भी भाजपा नीत एन.डी.ए. सरकारों ने कर्मचारियों के हितों पर कुठाराघात किया है जिसकी शुरूआत वर्ष 2003 में केंद्र की तत्कालीन एन.डी.ए. सरकार ने कर्मचारियों को धोखा देते हुए पैंशन बंद कर काले अध्याय लिखा था। उसके बाद अनुबंध पर नौकरियां देने का फैसला भाजपा सरकार ने ही लिया और अब जयराम सरकार ने ट्रिब्यूनल को बंद कर कर्मचारी विरोधी होने का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव के दौरान अपने दृष्टि पत्र में कर्मचारियों से अनेकों वायदे किए थे जिनमें पैंशन को लेकर भी एक कमेटी गठित करने की बात कही थी। लेकिन सत्ता के नशे में मदहोश जयराम सरकार अब तक कमेटी गठित करने सहित किसी भी वायदे पर दृष्टि डालने में भी फेल साबित हुई है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए कहा कि चुनावी दृष्टि पत्र तो सरकार की नजर-ए-इनायत कब होगी और कर्मचारियों से किए वायदों को लेकर कब नींद से जागेगी, यह तो सरकार व मुख्यमंत्री ही जानें। लेकिन अनुबंध कार्यकाल का वरिष्ठता लाभ कर्मचारियों का जायज हक है जिसका लाभ देकर भाजपा की पूर्व केंद्र व प्रदेश सरकारों द्वारा लिए कर्मचारी विरोधी फैसलों के दाग भाजपा के ऊपर से थोड़े बहुत जरूर धुल जाएंगे। उन्होंने कहा कि 4-9-14 के बारे में भी भाजपा सरकार का कर्मचारियों से किया गया वायदा महज एक छलावा साबित हुआ है। कर्मचारी वर्ग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने अपने दृष्टि पत्र में कर्मचारियों से वायदा किया था कि सत्ता में आने पर कर्मचारियों को 4-9-14 का लाभ दिया जाएगा। लेकिन अब सरकार के 2 साल पूरे होने को है लेकिन कर्मचारी अभी तक सरकार की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों को वेतन आयोग के लाभों से भी वंचित रख रही है।
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आईआईटी रुड़की ने लांच किया एलुमनी का ग्लोबल नेटवर्क - NAVAL TIMES
आईआईटी रुड़की ने लांच किया एलुमनी का ग्लोबल नेटवर्क
आईआईटी रुड़की ने दुनिया भर में रहने वाले अपने एलुमनी के साथ एक व्यापक संबंध स्थापित करने के लिए आईआईटी रुड़की एलुमनी का ग्लोबल नेटवर्क लांच किया है। यह संस्थान और उसके एलुमनी के एक व्यापक और सटीक एलुमनी डेटाबेस की जरूरत को पूरा करेगा।
इसके अलावा, कई एलुमनी एक ऐसे नेटवर्क की मांग कर रहे थे जो उन्हें एलुमनी को खोजने और उनके साथ जुड़ने में मदद कर सकता हो। साथ ही एक ही प्लेटफॉर्म के माध्यम से संस्थान के साथ संवाद करने की सुविधा भी प्रदान करता हो। ग्लोबल नेटवर्क इस जरूरत को भी पूरा करने की कोशिश करेगा। यह ग्लोबल नेटवर्क, थॉमसन कॉलेज ऑफ सिविल इंजीनियरिंग से यूनिवर्सिटी ऑफ रुड़की और अब आईआईटी रुड़की की यात्रा को संजोकर रखने में योगदान देगा। वर्ष 1847 में स्थापित इस संस्थान के शानदार इतिहास का हिस्सा रहे एलुमनी की पुरानी और नई पीढ़ियों को एक प्लेटफॉर्म पर लेकर आएगा। आईआईटी रुड़की एलुमनी का यह ग्लोबल नेटवर्क एलुमनी वालंटियर्स द्वारा संचालित किया जाएगा।
नेटवर्क के कार्यान्वयन में प्रावधान बनाए जाएंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सदस्यों की गोपनीयता संबंधी चिंताओं का पूरी तरह से ध्यान रखा जाए।
इसके अलावा, सदस्यों के पास अपनी इच्छा के अनुसार संदेशों और सेवाओं की सदस्यता शुरू और समाप्त करने का विकल्प होगा। डेटाबेस की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष ध्यान रखा जाएगा। नेटवर्क की सदस्यता से कई लाभ मिलेंगे। उदाहरण के लिए, नेटवर्क की लाइफ मेंबरशिप फ्री होगी।
सभी सदस्यों को एक पहचान पत्र जारी किया जाएगा। सदस्यों के पास दुनिया भर के लोकल, रीजनल और नेशनल नेटवर्क पर एलुमनी के साथ सोशल और प्रोफेशनल नेटवर्किंग के अवसर होंगे। यह संकट में फंसे किसी एलुमनी या उसके परिवार के लिए, उनके सहयोगी एलुमनी से मदद जुटाने के लिए एक प्रणाली का निर्माण करेगा।
सदस्यों के पास स्टूडेंट्स मेंटोरशिप प्रोग्राम्स, इंटर्नशिप और संस्थान की अन्य गतिविधियों जैसी योजनाओं में भाग लेने और योगदान करने के अवसर होंगे।
सदस्यों को ई-न्यूजलेटर्स के माध्यम से एलुमनी और अल्मा मेटर के बारे में नियमित अपडेट प्राप्त होगा। नेटवर्क में उत्कृष्ट योगदान देने वाले सदस्यों को उपयुक्त रूप से मान्यता दी जाएगी। पहचान पत्र धारकों के लिए विभिन्न संगठनों के उत्पादों और सेवाओं के लिए विशेष छूट की सुविधा दी जाएगी।पहचान पत्र सदस्यों को परिसर में सुचारू रूप से प्रवेश करने में मदद करेगा।
उपलब्धता के अनुसार, सदस्य रियायती दर पर आईआईटी रुड़की के गेस्टहाउस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। सदस्यों को एक ही प्लेटफॉर्म के माध्यम से डीन, हेड ऑफ डिपार्टमेंटध्सेंटर, विशेष क्षेत्र में विशेषज्ञता वाले फैकल्टी या संस्थान के कार्यालय से जुड़ने का अवसर मिलेगा। जहां भी संभव हो, सदस्यों के लिए पुस्तकालय सेवाओं का विस्तार करने की संभावना का पता लगाया जाएगा। अनुरोध पर, सदस्यों को स्थापना दिवस, स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस के अवसर पर आमंत्रित किया जाएगा।
सदस्य रविवार को परिसर के दौरे के लिए अनुरोध कर सकते हैं। परिसर के दौरे में जेम्स थॉमसन बिल्डिंग, हैंगर, इंस्टीट्यूट आर्काइव, मेडलिकॉट म्यूजियम और महात्मा गांधी सेंट्रल लाइब्रेरी के दौरे शामिल होंगे।
अनुरोध कम से कम एक सप्ताह पहले किया जाना चाहिए। इस अवसर पर, आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. अजीत चतुर्वेदी ने कहा, “इस डिजिटल युग में, सोशल और प्रोफेशनल नेटवर्किंग के संबंध में काफी बदलाव आया है। सूचना प्रौद्योगिकी ने एक पदानुक्रमित और नौकरशाही प्रणाली के बजाय एक सीधा और कुशल मंच के लिए एलुमनी और स्टूडेंट्स की अपेक्षाओं को बढ़ाया है। वे एक-दूसरे के साथ और संस्थान के साथ भी जुड़ना चाहते हैं।”
उन्होंने कहा “यह देश में संभवतरू अपनी तरह का पहला नेटवर्क होगा। हमें विश्वास है कि यह नेटवर्क अन्य शैक्षणिक संस्थानों में लागू किए जाने में भी सक्षम होगा।” |
इन्दौर लोकसभा सीट : सुमित्रा 'ताई' की सीट पर बड़े अंतर से जीते भाजपा के शंकर लालवानी - Ajay Bharat
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इन्दौर । मध्य प्रदेश की आर्थिक रूप से सबसे समृद्ध समझी जाने वाली लोकसभा सीट इन्दौर से भाजपा के शंकर लालवानी ने रिकार्ड जीत दर्ज की है। उन्होंने इन्दौर से 8 बार सांसद रहीं सुमित्रा महाजन को 2014 में मिली 466901 मतों की जीत के रिकार्ड को तोड़ते हुए अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के पंकज संघवी को 547754 मतों से हराया है। भाजपा प्रत्याशी लालवानी को कुल 1068569 मत मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी पंकज संघवी को 520815 मत मिले। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी लोकेश कुमार जाटव ने विजयी प्रत्याशी शंकर लालवानी को सांसद निर्वाचित होने का प्रमाण पत्र दिया। इस मौके पर सुमित्रा महाजन व विधायक रमेश मैंदोला भी मौजूद थे।
उल्लेखनीय है कि इन्दौर से 8 बार सांसद रहीं सुमित्रा महाजन को इस भाजपा ने टिकट नहीं दिया था। उनकी जगह ललवानी को पार्टी ने मैदान में उतारा था। हालांकि सुमित्रा महाजन इस सीट पर फिर से चुनाव लड़ने की इच्छुक थीं, लेकिन पार्टी की ओर से उम्मीदवार के नाम के ऐलान में देरी होते देख उन्होंने खुद ही यह ऐलान कर दिया था कि वह इस बार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी।
इस सीट पर पिछले मुकाबलों की बात करें तो लगातार 8 बार बीजेपी की तरफ से सुमित्रा महाजन कुर्सी पर काबिज रहीं। वहीं, कांग्रेस आखिरी बार 1984 में यहां से लोकसभा का चुनाव जीती थी। 2014 के चुनाव में भाजपा की सुमित्रा महाजन को 854972, कांग्रेस के सत्यनारायण पटेल को 388071 व आम आदमी पार्टी के अनिल त्रिवेदी को 35124 मत मिले थे। इस बार 2019 के लोकसभा चुनाव में इन्दौर सीट पर 20 प्रत्याशी चुनावी मैदान होकर मुख्य मुकाबला कांग्रेस के पंकज संघवी और भाजपा के शंकर लालवानी के मध्य था और लालवानी ने यह मुकाबला 547754 मतों के रिकार्ड अंतर से जीत लिया है।
यह भी उल्लेखनीय है कि भाजपा प्रत्याशी शंकर लालवानी ने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ते हुए बड़ी जीत दर्ज की है। लालवानी ने 1993 में पहली बार विधानसभा क्षेत्र-4 से भाजपा अध्यक्ष का कार्यभार संभाला था। इसके बाद 1996 में नगर निगम चुनाव में वे अपने भाई और कांग्रेस प्रत्याशी प्रकाश लालवानी को हराकर पार्षद बने। वे नगर निगम सभापति भी रहे। इसके बाद वे नगर अध्यक्ष रहे। वे इंदौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष भी रहे।
1998 में भाजपा की सुमित्रा महाजन से लोकसभा चुनाव हार चुके पकंज संघवी पर कांग्रेस ने एक बार फिर से भरोसा जताया, लेकिन उन्हें दूसरी बार भी हार का मुंह देखना पड़ा। संघवी 1983 में पहली बार पार्षद का चुनाव जीते। इसके बाद 1998 में पार्टी ने लोकसभा चुनाव का टिकट दिया, लेकिन सुमित्रा महाजन ने उन्हें 49 हजार 852 वोट से चुनाव हार दिया। इसके बाद 2009 में महापौर का चुनाव लड़े और भाजपा के कृष्णमुरारी मोघे से करीब 4 हजार वोट से हार गए। 2013 में वे इंदौर विधानसभा पांच नंबर सीट से करीब 12 हजार 500 वोट से विधानसभा चुनाव हारे।
:: इंदौर को 30 साल बाद पुरुष सांसद मिला ::
इन्दौर लोकसभा सीट से 1952 में कांग्रेस के नन्दलाल जोशी, 1957 में कांग्रेस के कन्हैयालाल खेड़ीवाला, 1962 में सीपीआई के होमी दाजी, 1967 में कांग्रेस के प्रकाशचंद्र सेठी, 1971 में कांग्रेस के रामसिंह भाई, 1977 में भारतीय लोकदल के कल्याण जैन, 1980 और 1984 में कांग्रेस के प्रकाशचन्द्र सेठी ने दो बार जीत हासिल की। इसके बाद सुमित्रा महाजन ने 1989 के आम चुनाव में पहली बार लोकसभा चुनाव में भाग लिया और उन्होंने कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश चंद्र सेठी को हराया। फिर भाजपा के टिकट पर सुमित्रा ताई ने 1991, 1996, 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 में जीत दर्ज की। वो प्रथम महिला हैं जो कभी लोकसभा चुनावों में पराजित नहीं हुई और आठ बार लोकसभा चुनाव जीतने वाली प्रथम महिला बनी। लालवानी के जीत से अब इन्दौर को 30 साल बाद पुरुष सांसद मिला है।
:: जीत का विश्वास तो था, पर इतनी बड़ी जीत की कल्पना नहीं थी : लालवानी
अपनी जीत पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शंकर ललवानी ने कहा – जीत का विश्वास तो था, पर इतनी बड़ी जीत की कल्पना नहीं थी। जनता ने इतनी बड़ी जीत दी है, तो मेरे ऊपर शहर की जनता का भार भी काफी रहेगा। बीआरटीएस के विकल्प के रूप में एलिवेटेड ब्रिज होगा, जो शहर की समस्या दूर होगी। ट्रैफिक सुधार और शहर के विकास के लिए ब्लू प्रिंट तैयार करेंगे। लालवानी ने जीत का श्रेय सबसे पहले नरेंद्र मोदी और अपनी पार्टी को दिया। अपने प्रतिद्वंदी पंकज संघवी को लेकर कहा कि वे टूरिस्ट वीजा लेकर चुनाव के मैदान में आते रहे हैं, जबकि उन्हें लगातार सक्रिय रहकर समाज की सेवा करना चाहिए। जनता के बीच रहना चाहिए, जो उन्होंने नहीं किया और इसके परिणाम सामने हैं।
:: संघवी ने लालवानी को दी जीत की बधाई ::
कांग्रेस के प्रत्याशी पंकज संघवी ने हार के बाद ट्वीट पर भाजपा के शंकर लालवानी को जीत की बधाई दी है। संघवी ने लिखा- हार जीत का फैसला तो भगवान करता है। इंसान कोशिश और मेहनत करता है। भाई शंकर लालवानी को जीत की बधाई। उन्होंने आगे लिखा – वल्लभ नगर मेरे निवास पर कई सालों से समाजसेवा जारी थी। आगे भी जारी रहेगी। गरीबों और जरूरतमंद लोगों की मदद आखिरी सांस तक करता रहूंगा।
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हम सत्ता नहीं, व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई लड़ रहे हैं :राय |
रावत राज में उत्तराखंडी भरेंगे ईमानदारी की रोयल्टी - Janpaksh
UPCL Loss 2019
त्रिवेन्द्र सिंह रावत सरकार में दिनों दिन उत्तराखंड की व्यवस्था बेपटरी होती जा रही हैं| मक्कारों का मकडजाल उत्तराखंड को चहू और से लूटने में लगा है| उत्तराखंड विधुत वितरण निगम उनमे से एक है जो मक्कारों को प्रोत्साहित करता हैं की वो बिजली की चोरी करे व इमानदार लोगो को बिल बढ़ाकर प्रताड़ित किया जा रहा हैं|
उत्तराखंड विधुत वितरण निगम अपने अन्दर फैले भ्रष्टाचार को लगाम ना लगा पाने के कारण फिर आयोग में बिजली की दरो को बढाने के लिए प्रस्ताव भेजा हैं व आकड़ो की आने तो इस बार वितरण निगम को वर्ष 2018-19 में 625 करोड़ की शुद्ध हानि हुई हैं जबकि 2017-18 में यही हानि 229 करोड़ थी इसका मतलब यह है की इस वर्ष पिछले वर्ष के मुकाबले 396 करोड़ ज्यादा की हानि हुई हैं|
वर्ष 2016 में केंद्र सरकार, उत्तराखंड सरकार व वितरण निगम के बीच में एक समझोता हुआ था जिसके अंतर्गत UPCL को अपने AT&C हानि को 2018-19 में 14.5 प्रतिशत तक लेकर आनी थी लेकिन विधुत वितरण खंड हल्द्वानी के अनुसार उनका पारेषण, वितरण व आय का अन्तराल 20.06 प्रतिशत हैं जिसका मतलब की हल्द्वानी में एक करोड़ की बिजली के बदले 79 लाख 96 हजार ही आते हैं|
सिर्फ हल्द्वानी में अगर 20 प्रतिशत बिजली चोरी हो रही हैं तो आप समझ सकते हैं की पूरे प्रदेश का हाल क्या होगा? 20% T&D की हानि हैं तो उसमे से आधा हिस्सा चोरी का हैं जिसे की उत्तराखंड विधुत वितरण निगम को रोकना चाहिए था| इस वर्ष 625 करोड़ की भरपाई के लिए निगम ने आयोग से बिजली की दरो को बढाने की गुहार की है|
Electricity Theft at Bareilly Road, Haldwani.
यह बिजली की दरे केवल और केवल इमानदार उपभोक्ताओं के लिए बढेंगी क्योकि मक्कार व चोर लोग बिजली पहले की तरह फ्री में जलाते रहेंगे और इनको देख कर और लोग भी चोरी के लिए प्रेरित होंगे और यह घाटा दिनोंदिन बढ़ता रहेगा जो की आय व्यय के आंकड़ो में नज़र आता हैं| अगर आप देखे तो पिछले साल 2017-18 में 22.01 प्रतिशत का T&D हानि थी और 229 करोड़ का घाटा हुआ था जबकि 2018-19 में घाटा 20.06 हुआ हैं जबकि हानि पिछले साल से तिगुना 625 करोड़ की शुद्ध हानि हुई हैं जो की घाटा घटने के बाद भी तिगुनी हुई हैं|
उत्तराखंड की जनता आज उत्तराखंड में इमानदार होने की रोयल्टी दे रही हैं क्योकि बढे हुए दरें केवल और केवल ईमानदार लोग ही भरेंगे वो भी बिना किसी विरोध के ओर यही बढ़ा हुआ पैसा ही उत्तराखंड में हमारे ईमानदार बने रहने की रॉयल्टी हैं।
आपकी टिप्पणियों का स्वागत हैं आप हमें 05946 222224 पर व्हात्सप्प भी कर सकते हैं |
UPCL Agreement details with Central Govt.
किराना, रेस्तरां के लिए सिंगल-विंडो, रिनुवल ख़त्म
पूर्व सैनिक स्वास्थ योजना ECHS में फर्जीवाडा
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पालिका सीट दूसरे राउंड में भी वत्सला आगे | दैनिक दर्शन 24 न्यूज़
December 1, 2017 NAGAR PALIKA 2017 No comments
फर्रुखाबाद। नगर निकाय चुनाव के दूसरे राउंड की मतगणना खत्म हो गई। इसमें सदर नगर पालिका से बसपा प्रत्याशी वत्सला अग्रवाल ने लगभग 10647मतों से बढ़त बना ली है। जबकि दूसरे नंबर पर मौजूद मिथलेश अग्रवाल को 14777 वोट मिले। इसके अलावा सपा प्रत्याशी दमयंती सिंह 7918 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर हैं। कांग्रेस के हाजी अहमद अंसारी को 3103 वोट मिले।
फर्रुखाबाद – दूसरा राउंड
भाजपा:- 14777
बसपा:- 25424
सपा:- 7918
कांग्रेस:- 3103 |
Chhattisgarh News In Hindi : Bilaspur News - chhattisgarh news celebration of second independence on merger of jammu and kashmir saw | जम्मू कश्मीर के विलय पर दूसरी आजादी का जश्न:साव - bilaspur News,बिलासपुर न्यूज़,बिलासपुर समाचार
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जम्मू कश्मीर के विलय पर दूसरी आजादी का जश्न:साव
Bilaspur News - बिलासपुर | भारतीय जनता युवा मोर्चा द्वारा बुधवार की शाम बस स्टैंड में केंद्र सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर में धारा 370...
बिलासपुर | भारतीय जनता युवा मोर्चा द्वारा बुधवार की शाम बस स्टैंड में केंद्र सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर में धारा 370 और 35-ए हटाने के फैसले का स्वागत करते हुए खुशियां मनाई। भारत गणराज्य में जम्मू-कश्मीर के पूर्ण विलय के संबंध में जनमानस को अवगत करते हुए इस मौके पर सांसद अरुण साव का सम्मान किया गया। सांसद साव ने कहा कि भारत के उज्जवल भविष्य के नव निर्माण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने 5 वर्षों में अनेक ऐतिहासिक साहसिक निर्णय लिए। उन्होंने कहा कि जैसे 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ था उसी तरह 5 अगस्त 2019 को देश को दूसरी आजादी के रूप में जम्मू कश्मीर का पूर्ण विलय भारतीय गणराज्य में हुआ। इस मौके पर बेलतरा विधायक रजनीश सिंह ने कहा कि देश को आजादी के 72 वर्षों में आज देश की जनता को महसूस हो रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार लगातार देश के सर्वांगीण विकास के लिए काम कर रही है। महापौर किशोर राय ने कहा कि जनसंघ के संस्थापक डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं पं.दीनदयाल उपाध्याय ने जो सपना देखा था उसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं गृहमंत्री अमित शाह ने 5 जुलाई 2019 को पूरा कर दिया। कार्यक्रम में भाजयुमो जिलाध्यक्ष दीपक सिंह ठाकुर ने सांसद अरुण साव का शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया। कार्यक्रम में बेलतरा विधायक रजनीश सिंह, महापौर किशोर राय, भाजपा जिला महामंत्री रामदेव कुमावत का भी सम्मान किया गया। कार्यक्रम में भाजयुमो जिलाध्यक्ष दीपक सिंह ठाकुर, सुशांत शुक्ला, दुर्गा कश्यप, लोकेशधर दीवान, जयश्री चौकसे, संदीप दास, आदि मौजूद थे।
भाजयुमाे के बस स्टैंड में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेते भाजपा नेता।
जूदेव की पुण्यतिथि पर भाजपाइयों ने दी श्रद्धांजलि
बुधवार को भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव 6वीं पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस मौके पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उनके संस्मरणों को विशेष रूप से याद किया गया। इस मौके पर बिलासपुर के सांसद अरुण साव, बेलतरा विधायक रजनीश सिंह, छतीसगढ़ महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष हर्षिता पांडेय, महापौर किशोर रॉय , जिला महामंत्री रामदेव कुमावत , राष्ट्रीय सदस्य सुशांत शुक्ला, युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष दीपक सिंह, राजेश सिंह ठाकुर , राकेश तिवारी , सुनीता मानिकपुरी, जयश्री चौकसे, नंदू सोनी, संजय मुरारका आदि उपस्थित हुए। |
अजित सिंह की पार्टी को तीन सीटे देना चाहते हैं जबकि रालोद 5 सीटें लेने पर अड़ी है. इसी को लेकर पेच फंसता दिखाई दे रहा है
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के मुखिया शनिवार को साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गठबंधन का औपचारिक ऐलान कर सकते हैं. शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि हम महागठबंधन में शामिल हैं,
लेकिन सीटों पर कोई बात नहीं हुई है. अजित सिंह ने कहा कि मायावती और अखिलेश यादव की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के बारे में कोई जानकारी नहीं है. सम्मानजनक सीटों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि वह अगर-मगर की बात नहीं करना चाहते हैं.
इस गठबंधन में राष्ट्रीय लोकदल के शामिल होने की संभावनाओं पर पार्टी प्रमुख अजित सिंह का कहना है कि अभी सीटों को लेकर उनकी कोई बात नहीं हुई है, लेकिन हमले महागठबंधन में शामिल हैं.
आपको बता दें कि अजित सिंह का ये बयान तब सामने आया है जब रालोद का सीटों को लेकर पेच फंसता दिख रहा है. सूत्रों की मानें तो समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन में अजित सिंह की पार्टी को तीन सीटे देना चाहते हैं जबकि रालोद 5 सीटें लेने पर अड़ी है. इसी को लेकर पेच फंसता दिखाई दे रहा है.
#अजित सिंह #बहुजन समाज पार्टी अखिलेश यादव मायावती समाजवादी पार्टी |
Dibakar Banerjee, nine other filmmakers return national award |
विरोध में उतरे फिल्मकार, 10 फिल्मकारों ने लौटाया नेशनल अवॉर्ड
By: admin | Last Updated: Wednesday, 28 October 2015 1:45 PM
नई दिल्लीः पहले साहित्यकार, फिर वैज्ञानिक और अब फिल्मकार खुलकर सरकार के विरोध में उतर आए हैं. जानेमाने फिल्मकारों दिबाकर बनर्जी, आनंद पटवर्धन तथा आठ अन्य लोगों ने आज एफटीआईआई के आंदोलनकारी छात्रों के साथ एकजुटता प्रकट करते हुए तथा देश में बढ़ती असहिष्णुता के विरोध में अपने राष्ट्रीय पुरस्कार लौटा दिए.
बनर्जी और अन्य फिल्मकारों ने कहा कि उन्होंने छात्रों के मुद्दों के निवारण तथा बहस के खिलाफ असहिष्णुता के माहौल को दूर करने में सरकार की ओर से दिखाई गई उदासीनता के मद्देनजर ये कदम उठाए हैं.
बनर्जी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं गुस्से, आक्रोश में यहां नहीं आया हूं. ये भावनाएं मेरे भीतर लंबे समय से हैं. मैं यहां आपका ध्यान खींचने के लिए हूं. ‘खोसला का घोसला’ के लिए मिला अपना पहला राष्ट्रीय पुरस्कार लौटाना आसान नहीं है. यह मेरी पहली फिल्म थी और बहुत सारे लोगों के लिए मेरी सबसे पसंदीदा फिल्म थी.’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर बहस, सवाल पूछे जाने को लेकर असहिष्णुता तथा पढ़ाई के माहौल को बेहतर बनाने की चाहत रखने वाले छात्र समूह को लेकर असहिष्णुता होगी, तो फिर यह असहिष्णुता उदासीनता में प्रकट होती है. इसी को लेकर हम विरोध जता रहे हैं.’’ जानेमाने डाक्यूमेंटरी निर्माता पटवर्धन ने कहा कि सरकार ने ‘अति दक्षिणपंथी धड़ों’ को प्रोत्साहित किया है.
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इस तरह से एक समय पर बहुत सारी घटनाएं होती नहीं देखी हैं. क्या होने वाला है, यह उसकी शुरूआत है और मुझे लगता है कि पूरे देश में लोग अलग अलग तरीकों से प्रतिक्रिया दे रहे हैं.’’ एफटीआईआई के छात्रों ने आज अपनी 139 दिनों पुरानी हड़ताल खत्म कर दी, हालांकि वे संस्थान के अध्यक्ष पद पर गजेंद्र चौहान की नियुक्ति का विरोध एवं उनको हटाने की मांग जारी रखेंगे.
उर्स ने कहा, ‘‘परंतु हम इसका इस्तेमाल केवल यह कहने के लिए नहीं कर रहे है कि हम शिक्षा की ओर वापस जा रहे हैं बल्कि हम इस मौके का इस्तेमाल फिल्मनिर्माताओं, शिक्षाविदों और देश के नागरिकों से आह्वान करने के लिए करना चाहते हैं कि वे इस लड़ाई को आगे ले जाएं. उन्होंने कहा कि परिसर अभी भी ऐसी तख्तियों और.िचत्रों से भरा हुआ है जिसमें ‘‘लोकतंत्र पर हमले’’ की निंदा की गई है. छात्रों को प्रताड़ित करने की संभावना को लेकर पूछे गए सवाल पर एक अन्य छात्र प्रतिनिधि राकेश शुक्ल ने कहा, ‘‘हमें निश्चित तौर पर इसका भय है.’’ एफटीआईआई हड़ताल ने पूरे देश का ध्यान आकृष्ट किया और भारतीय सिनेमा की प्रमुख हस्तियों ने आंदोलन को अपना समर्थन दिया था.
20 अक्तूबर को आंदोलनकारी छात्रों और राठौड़ के बीच दिल्ली में बातचीत हुई थी लेकिन वह गतिरोध समाप्त करने में असफल रही थी.
एफएसए के विरोध जारी रखने के खतरे के बारे में पूछे जाने पर राठौड़ ने कहा कि ‘‘यदि वे किसी चीज के बारे में दृढ़ता से कुछ महसूस करते हैं’’ तो वे यह कर सकते हैं.
छात्र गत 12 जून से ही कक्षा का बहिष्कार कर रहे थे और वे चौहान को पद से हटाने की अपनी मांग पर अड़े हुए थे जबकि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने उनकी नियुक्ति का मजबूती से समर्थन किया.
इस बीच मुंबई से प्राप्त समाचार के अनुसार जानेमाने फिल्मकारों दिबाकर बनर्जी, आनंद पटवर्धन तथा आठ अन्य लोगों ने एफटीआईआई के आंदोलनकारी छात्रों के साथ एकजुटता प्रकट करते हुए तथा देश में बढ़ती असहिष्णुता के विरोध में अपने राष्ट्रीय पुरस्कार लौटा दिए.
हालांकि छात्रों ने बुधवार को अपनी हड़ताल तो वापस लो ली है पर छात्रों का कहना है कि यह विरोध अभी भी जारी है.
किस-किस ने सम्मान लौटाया?
अवॉर्ड लौटाने वालों में खोसला का घोसला, ओए लकी, लकी ओए, लव सेक्स और धोखा, बॉम्बे टॉकीज़ और डिटेक्टिव ब्योमकेश बख्शी जैसी फिल्में बनाने वाले फिल्मकार दिबाकर बनर्जी शामिल हैं. उनके अलावा राम के नाम, फादर सन एंड होली वार और वॉर एंड पीस जैसी चर्चित फिल्में बना चुके फिल्मकार आनंद पटवर्धन.
गुलाबी गैंग समेत कई फिल्मों का निर्देशन कर चुकीं निष्ठा जैन, शूल और केरला कैफे जैसी फिल्मों में सिनेमैटोग्राफर का काम कर चुके हरि नायर, फिल्म निर्देशिका लिपिका सिंह, फिल्मकार कीर्ति नाखवा और हिंदी फिल्म हंसी तो फंसी समेत कई फिल्मों के लेखक हर्ष कुलकर्णी शामिल हैं.
कलबुर्गी हत्याकांड, FTII विवाद के विरोध में 10 फिल्मकारों ने नेशनल ऑवार्ड लौटाया
Web Title: Dibakar Banerjee, nine other filmmakers return national award
और जाने: Dibakar Banerjee filmmakers national award Return
First Published: Wednesday, 28 October 2015 1:45 PM |
रामअविता नाम का अर्थ, मतलब, राशि, राशिफल - Ramavita naam ka meaning, matlab, arth, rashi in hindi
रामअविता का मतलब और राशि - Ramavita meaning aur rashi in hindi
English: Ramavita
रामअविता नाम की राशि - Ramavita naam ka rashifal
शुक्र ग्रह तुला पर शासन करता है। कुलस्वामिनी को तुला राशि का आराध्य माना जाता है। इस राशि के व्यक्ति ठण्डी और सुहावनी रातें वाले मौसम में पैदा होते हैं। इस राशि के रामअविता नाम की लड़कियाँ भोले भाले होते हैं। तुला राशि के रामअविता नाम की लड़कियाँ चर्म रोग और किडनी की समस्याओं से ग्रस्त होते हैं। रामअविता नाम की लड़कियाँ दृष्टिदोष तथा निचले हिस्से में पीठ दर्द की समस्याओं से परेशान रहते हैं। तुला राशि के रामअविता नाम की लड़कियाँ ज़रूरत पड़ने पर किसी भी प्रियजन के लिए त्याग करने से कतराते नहीं हैं।
रामअविता नाम का शुभ अंक - Ramavita naam ka lucky number
रामअविता नाम का स्वामी शुक्र ग्रह और शुभ अंक 6 है। रामअविता नाम वाली 6 अंक की लड़कियां बहुत आकर्षक व खूबसूरत होती हैं। रामअविता नाम की महिलाओं को स्वच्छता का बहुत ख्याल रहता है और कला के क्षेत्र में हमेशा अच्छा प्रदर्शन करती हैं। रामअविता नाम वाली लड़कियां व्यव्हार से सहनशील और घूमने-फिरने के शौक़ीन होती हैं। 6 अंक वाली लड़कियां दूसरों को बड़ी जल्दी आकर्षित कर लेती हैं। अपने जीवन में परिवार का प्यार और सहयोग भरपूर मिलता है रामअविता नाम की लड़कियों को।
रामअविता नाम के व्यक्ति का व्यक्तित्व - Ramavita naam ke vyakti ki personality
रामअविता नाम वाली महिलाओं की राशि तुला है। रामअविता नाम की लड़कियां अक्सर अपने लाभ के बारे में सोचती हैं और इसलिए इनमें संतुलन की कमी होती है। तुला राशि वाली महिलाएं जिनका नाम रामअविता है, वे लोग ज़रूरतों और अपनी चाहतों के मुताबिक सोच बदल लेती हैं। रामअविता नाम की लड़कियों के पास हर बात का तर्क होता है। ये भविष्य के बारे में ज्यादा सोचती हैं। रामअविता नाम की लड़कियों का स्वभाव बहुत अच्छा होता है, लेकिन ये कभी खुद निर्णय नहीं लेती हैं क्योंकि इन्हें जिम्मेदारी लेना पसंद नहीं होता। रामअविता नाम की महिलाएं हमेशा चीजों व लोगों की आपस में तुलना करने लग जाती हैं।
रामअविता की तुला राशि के हिसाब से और नाम |
नगर परिषद ने खांदू कॉलोनी में अवैध केबिन को हटाया | नगर परिषद ने खांदू कॉलोनी में अवैध केबिन को हटाया - Banswara News,बांसवाड़ा न्यूज़,बांसवाड़ा समाचार
नगर परिषद ने खांदू कॉलोनी में अवैध केबिन को हटाया
Banswara News - खांदू कॉलोनी में अवैध केबिन हटाते परिषद कर्मचारी। बांसवाड़ा। नगर परिषद ने अतिक्रमण चिन्हित करने के बाद अब...
खांदू कॉलोनी में अवैध केबिन हटाते परिषद कर्मचारी।
बांसवाड़ा। नगर परिषद ने अतिक्रमण चिन्हित करने के बाद अब इन्हें हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
इसी के तहत सोमवार को खांदू कॉलोनी में स्थित शुभ गार्डन के समीप बिना स्वीकृति लगाए गए एक केबिन हटाया गया। हल्का निरक्षक हेमंत भट्ट ने बताया कि केबिन अतिक्रमण की श्रेणी में था। जिस पर जाहिद खान और कुलदीप निनामा टीम के साथ पहुंचे और हटाने की कार्रवाई की। गौरतल है कि इससे पहले परिषद ने सभी वार्डों में अतिक्रमण चिन्हित कर उन पर लाल रंग से क्रॉस लगाने का अभियान चलाया था। यह प्रक्रिया पूरी होने पर अब चिन्हित अतिक्रमण हटाए जा रहे है। |
गणतंत्र दिवस पर शिवराज सिंह की बड़ी घोषणा, एमपी होगा पॉलिथीन फ्री - Shivraj singh chauhan announced ban on polythene in madhya pradesh from may 1 - AajTak
गणतंत्र दिवस पर शिवराज सिंह की बड़ी घोषणा, एमपी होगा पॉलिथीन फ्री
सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में गुरुवार को गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान ऐलान किया कि राज्य में 1 मई से पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा. गणतंत्र दिवस समारोह के बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट करके भी इस बात की जानकारी सोशल मीडिया पर दी.
रवीश पाल सिंह [Edited By: कौशलेन्द्र] @ReporterRavish
भोपाल, 27 जनवरी 2017, अपडेटेड 06:48 IST
यदि आप मध्यप्रदेश में रहते हैं और जरूरत की हर सामग्री को उठाने लिए पॉलिथीन इस्तेमाल करते हैं तो अपनी आदत जल्द ही बदल डालिए क्योंकि मध्यप्रदेश बहुत ही जल्द पॉलिथीन प्रतिबंधित राज्य बनने जा रहा है.
सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में गुरुवार को गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान ऐलान किया कि राज्य में 1 मई से पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा. समारोह में लोगों को संबोधित करते हुए सीएम शिवराज ने कहा कि पॉलिथीन से जगह-जगह गंदगी के ढ़ेर बन जाते हैं जो कि अस्वच्छता फैलाते हैं और इसलिए इस तस्वीर को बदलने की ज़रूरत है.
इस मौके पर शिवराज ने कहा कि अगले 3 महीने में लोग पॉलिथीन से दूरी बनाने की आदत डाल लें ताकि 1 मई से उन्हें परेशानी न हो. सीएम शिवराज ने इस दौरान लोगों को सचेत भी किया कि 1 मई के बाद पॉलिथीन का इस्तेमाल करने पर कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी.
गणतंत्र दिवस समारोह के बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट करके भी इस बात की जानकारी सोशल मीडिया पर दी. उन्होंने अपना वीडियो ट्वीट किया जिसमें वो लोगों को संबोधित करते हुए बोल रहे हैं कि "मध्यप्रदेश की धरती पर एक मई से पॉलीथिन की पन्नियां नहीं दिखाई देंगी. पूरी तरह से इस पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा."
मध्यप्रदेश की धरती पर एक मई से पॉलीथिन की पन्नियाँ नहीं दिखाई देंगी। पूरी तरह से इस पर प्रतिबंध लगा दिया जायेगा। #RepublicDay pic.twitter.com/X4RjqX44Y2
— ShivrajSingh Chouhan (@ChouhanShivraj) January 26, 2017
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तेलुगु देशम और टी आर एस की दिल्ली में सरगर्मीयां मुख़्तलिफ़ क़ाइदीन से मुलाक़ातें - The Siasat Daily
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तेलुगु देशम और टी आर एस की दिल्ली में सरगर्मीयां मुख़्तलिफ़ क़ाइदीन से मुलाक़ातें
February 4, 2014 India
आंध्र प्रदेश की इलाक़ाई जमातों ने अलाहिदा रियासत तेलंगाना के मसले पर आज मुख़्तलिफ़ सियासी जमातों से सिलसिला वार मुलाक़ातें की।
सदर तेलुगु देशम पार्टी एन चंद्राबाबू नायडू ने जहां बी जे पी और जनतादल ( यू) क़ाइदीन से मुलाक़ात की वहीं टी आर एस सरबराह के चन्द्र शेखर राव ने सी पी आई क़ाइदीन से मुलाक़ात की।
दोनों पार्टीयों ने आर एलडी सरबराह अजीत सिंह से तीन घंटे के वक़फ़ा से अलहदा मुलाक़ातें कीं। सी पी आई और आर एलडी ने जहां इस बिल की ताईद का यक़ीन दिलाया वहीं जनतादल (यू) ने कहा कि वो किसी फ़ैसले से पहले पार्टी मीटिंग में ग़ौर-ओ-ख़ौज़ करेगी।
तेलुगु देशम पार्टी सदर एन चंद्राबाबू नायडू की ज़ेरे सदारत पार्टी वफ़द ने आज सदर बी जे पी राजनाथ सिंह से मुलाक़ात की। चंद्राबाबू नायडू ने रियासत को तक़सीम करने कांग्रेस के फ़ैसले की वजह से पैदा शूदा सूरत-ए-हाल से सदर बी जे पी को वाक़िफ़ किराया।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि वो दुसरे इलाक़ों के अवाम के साथ मुकम्मिल इंसाफ़ को यक़ीनी बनाए बगै़र बिल को मंज़ूर होने ना दें। इस ज़िमन में वो मर्कज़ पर दबाव डालें।
चंद्राबाबू नायडू ने राज नाथ सिंह से मुलाक़ात के बाद मीडीया से बात करते हुए मर्कज़ पर रियासत की तक़सीम के सिलसिले में दस्तूरी क़वाइद की मुबय्यना तौर पर ख़िलाफ़वरज़ी का इल्ज़ाम आइद किया।
उन्होंने ये जानना चाहा कि क्या किरण कुमार रेड्डी को इस मसले पर सड़कों पर आना चाहीए या वो सोनिया गांधी के साथ इस मसले को हल करने की कोशिश करें ?।
उन्होंने कहा कि किरण कुमार रेड्डी और जगन मोहन रेड्डी के पास ये हौसला नहीं है कि वो सोनिया गांधी के घर के रूबरू धरना दें। बादअज़ां चंद्राबाबू नायडू ने सदर जमहूरीया परनब मुखर्जी से मुलाक़ात की और आंध्र प्रदेश तंज़ीम जदीद बिल 2013 में ख़िलाफ़ वरज़ीयों को उजागर क्या।
दूसरी तरफ़ टी आर एस ने इस यक़ीन का इज़हार किया कि ये बिल पार्लियामेंट में मंज़ूर होजाएगा। ज़राए इबलाग़ के नुमाइंदों से बातचीत करते हुए के चन्द्र शेखर राव ने कहा कि उन्हें बिल की मंज़ूरी का सद फ़ीसद यक़ीन है।
वो नहीं समझते कि बी जे पी अपने मौक़िफ़ से पलट जाएगी। उन्होंने सीनीयर बी जे पी लीडर सुषमा स्वाराज के तेलंगाना बिल की ताईद में दिए गए बयान का हवाला दिया।
Previous सदर आई सी सी की मुत्तहदा अरब इमारात को मुबारकबाद
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शरिया न्यायालय: लोकतंत्र के स्थान पर धर्मतंत्र लागू करने का घातक मंसूबा -डॉ. प्रमोद पाठक | क्रांतिदूत
शरिया न्यायालय: लोकतंत्र के स्थान पर धर्मतंत्र लागू करने का घातक मंसूबा -डॉ. प्रमोद पाठक
0 0 Harihar Sharma शनिवार, 14 जुलाई 2018
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने घोषणा की है कि बोर्ड पूरे भारत में शरिया कोर्ट स्थापित करना शुरू करने वाला है । य...
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने घोषणा की है कि बोर्ड पूरे भारत में शरिया कोर्ट स्थापित करना शुरू करने वाला है । यह एक ऐसा असंवैधानिक कदम है जिसे बोर्ड बिना बिचारे अविवेकपूर्ण ढंग से उठाने जा रहा है । उसने यह भी नहीं सोचा कि इससे मुस्लिम समाज का भी को हित है अथवा नहीं ।
कुछ वर्ष पहले, इस्लामी संगठनों ने केरल में, विशेष रूप से मुस्लिम बहुल जिलों में शरिया कोर्ट शुरू किए थे, लेकिन उन्हें कभी कोई मान्यता नहीं मिली । निश्चित रूप से, काजियों और कठमुल्लाओं द्वारा दिए गए निर्णयों को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया ।
आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जो भारत में मुस्लिम आबादी का प्रतिनिधित्व करने का दावा करता है और सत्तारूढ़ केंद्र सरकार के समक्ष शक्ति प्रदर्शन पर आमादा है, जब ऐसा कदम उठाये, तब उसके छुपे मकसद को समझकर गंभीरता से लेने की जरूरत है।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि मुसलमानों के सिविल मामलों को निबटाने के लिए, पहले से ही भारतीय संविधान में मुस्लिम पर्सनल लॉ निर्मित है, जो लगभग शरिया के आदेशों के अनुरूप ही है। जहाँ तक आपराधिक मामलों का प्रश्न है, वे तो चाहे जितने शरीया कोर्ट बना लो, चलेंगे संविधान के अनुरूप ही | अपराध चाहे हिन्दू करे या मुसलमान, पुलिस कार्यवाही तो एक समान होगी | तो अब सवाल उठता है कि फिर देश में समानान्तर शरिया अदालतों को चलाने की आवश्यकता ही कहां है?
किसके लिए होंगे ये शरिया न्यायालय?
एआईएमपीएलबी पर मुख्यतः कट्टरपंथी सुन्नीयों का प्रभुत्व है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि हाल ही में, इस्लाम के शिया संप्रदाय के लोगों ने रामजन्मभूमि, ट्रिपल तलाक जैसे विषयों पर, सुन्नी संप्रदाय की राय से अलग राय व्यक्त की हैं | जाहिर है कि वे सुन्नियों द्वारा अपने साथ किये जा रहे भेदभाव को महसूस करते हैं। मुस्लिम संप्रदायों के बीच कई अन्य धार्मिक मतभेद हैं और उन्हें कभी सुलझाया नहीं गया है। खोजा, बोहरा और अन्य जैसे छोटे छोटे संप्रदाय, सुन्नी बहुमत के साथ मतभेद रखते हैं और भेदभाव महसूस करते हैं। इसके बाद भी सुन्नी प्रभुत्व वाला एआईएमपीएलबी, मुस्लिम समुदाय के बीच खिची सांप्रदायिक विभाजन की ओर बिना ध्यान दिए, सभी पर समान रूप से शरिया कोड लागू करने की कोशिश कर रहा है? ऐसे में सवाल उठता है कि क्या काजियों द्वारा धुर सांप्रदायिक आधार पर दिए गए फैसले, पूरी मुस्लिम आबादी को स्वीकार्य होंगे? क्या मुसलमानों के पासमांडा, असलाट और अर्जल, ताकत के बूते अशरफ द्वारा लगाए गए शरिया को स्वीकार करेंगे?
गुजरे जमाने की आपराधिक न्यायप्रणाली
माना जाता है कि शरिया कानून, पवित्र कुरान के आदेशों पर आधारित हैं तथा हदीस कथाओं द्वारा समर्थित हैं | सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात जैसे इस्लामी देशों में और अफगानिस्तान में अल-कायदा जैसे आतंकवादी संगठनों द्वारा इनका कड़ाई से पालन किया जाता हैं। न्याय, खुले में होता है, जहां अपराधियों को जमीन पर पटक कर उनका सिर या कोई अन्य अंग आदि काटा जाता है ।
क्या भारत में भी शरिया अदालतें इसी प्रकार आपराधिक मामलों पर विचार करेंगी और उपरोक्त इस्लामी देशों की तर्ज पर फैसले भी लागू करेंगी? इन दंडों को वे कैसे लागू करेंगे ? जो भी न्यायाधीश या उनका अधीनस्थ इस प्रकार के दंड देगा, क्या वह भारतीय संविधान के विरुद्ध नहीं होगा ? ऐसी परिस्थिति में भारतीय न्याय तंत्र क्या चुपचाप तमाशा देखेगा?
एआईएमपीएलबी और बोर्ड के सभी सदस्य भी क़ानून के जानकार हैं, तथा वे बहुत अच्छी तरह से जानते हैं कि उनके इस कदम का हर स्तर पर विरोध होगा । और वे चाहते भी यही हैं | उनका एकमात्र उद्देश्य तो मुस्लिम जन के मन में लोकतंत्र के प्रति विरोधी वातावरण बनाना और मुल्लाओं के प्रभुत्व को स्वीकार करने की मानसिकता तैयार करना है। कुल मिलाकर यह आने वाले लोकसभा चुनावों में मुसलमानों के ध्रुवीकरण का प्रयास है | मुस्लिम जनता चुनाव में केवल उसी को वोट करे, जो पिछले दरवाजे से उनके ईश्वरीय शासन को लागू करने का वादा करे | निश्चय ही यह एक भयानक षडयंत्र का खाका खींचा जा रहा है । इसका एक मकसद उन मदरसा स्नातकों को रोजगार मुहैय्या कराना भी है, जो इस्लामी ग्रंथों और अरबी भाषा से परे कुछ भी नहीं जानते ।
काश मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की उम्मीदें ओंधे मुंह गिरें, क्योंकि इसके पीछे केवल भारत को सांप्रदायिक आधार पर विभाजित करना है। यह मुस्लिम समाज के प्रगतिशील लोगों के लिए सही समय है कि वे मुल्लावाद के विरोध में खुलकर आवाज उठायें, जैसा कि अन्य इस्लामी देशों में भी हो रहा है।
सौजन्य: Organiser
क्रांतिदूत: शरिया न्यायालय: लोकतंत्र के स्थान पर धर्मतंत्र लागू करने का घातक मंसूबा -डॉ. प्रमोद पाठक |
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